25 जून 1975 को देश में लागू किए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे विवादित और चुनौतीपूर्ण दौर माना जाता है। इसी तारीख को केंद्र सरकार द्वारा “संविधान हत्या दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है, ताकि उस दौर की घटनाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभाव को याद रखा जा सके।
इसी बीच NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल पर एक अलग अध्याय शामिल किया है। नई पुस्तक “अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड” में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।
‘लोकतंत्र के लिए चुनौती’ अध्याय में आपातकाल का जिक्र
पुस्तक में कहा गया है कि 1975 से 1977 के बीच लागू आपातकाल के दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई थी और कई विपक्षी नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। इसके चलते लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर दबाव पड़ा और नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक असर देखने को मिला।
बढ़ती असंतुष्टि बनी थी पृष्ठभूमि
NCERT के अनुसार, 1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा था। देशभर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे, जिसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया।
जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी उल्लेख
अध्याय में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जन आंदोलनों का भी जिक्र किया गया है। विशेष रूप से बिहार और गुजरात में हुए छात्र आंदोलनों को लोकतांत्रिक जागरूकता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया गया है।
पुस्तक के अनुसार, 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनावों में जनता ने मतदान के जरिए अपना फैसला सुनाया। तत्कालीन सरकार की हार को भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और जनता की सर्वोच्च भूमिका का प्रतीक बताया गया है।
