मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा स्कॉलर्स डेन को सील किए जाने के बाद कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने संस्थान प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सीलिंग से ठीक पहले तक संस्थान के संचालक विवेक ठाकुर छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और स्टाफ को यह भरोसा दिलाते रहे कि संस्थान के पास सभी आवश्यक विभागीय अनुमतियां और एनओसी मौजूद हैं तथा उसे सील किए जाने की खबरें पूरी तरह झूठी और भ्रामक हैं।

सूत्रों के अनुसार पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर संस्थान के पास आवश्यक विभागीय स्वीकृतियां न होने तथा अवैध रूप से संचालन किए जाने संबंधी खबरें लगातार सामने आ रही थीं। इसको लेकर चिंतित छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक बार-बार प्रबंधन से सवाल भी कर रहे थे। आरोप है कि हर बार उन्हें यही जवाब दिया गया कि संस्थान के खिलाफ चल रही खबरें तथ्यहीन हैं और कोचिंग पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने वाली।

जब सीलिंग टीम पहुंची तब चल रही थीं नियमित कक्षाएं
बुधवार शाम जब मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की टीम सीलिंग की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची तो भवन के भीतर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हुए मिले। एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कार्रवाई शुरू करने से पहले सभी विद्यार्थियों और फैकल्टी को भवन से बाहर निकलवाया गया। इसके बाद नियमानुसार पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए भवन को सील कर दिया गया।

छात्र बोले- हमें आखिरी समय तक गुमराह किया गया
सीलिंग के दौरान मौके पर मौजूद कई छात्र-छात्राओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे और उनके अभिभावक लगातार संस्थान से विभागीय अनुमतियों को लेकर जानकारी मांग रहे थे। उनका कहना था कि प्रबंधन हर बार उन्हें आश्वस्त करता रहा कि सभी अनुमतियां मौजूद हैं और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही खबरें पूरी तरह झूठी हैं।
छात्रों का कहना है कि प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया कि संस्थान के संचालन को लेकर जो सवाल उठ रहे थे, वे निराधार नहीं थे। उनका आरोप है कि यदि संस्थान के पास आवश्यक अनुमतियां नहीं थीं तो प्रबंधन को छात्रों और अभिभावकों को वास्तविक स्थिति बतानी चाहिए थी।
फीस वापसी की मांग तेज
कार्रवाई के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने संस्थान से फीस वापसी की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि संस्थान वैधानिक औपचारिकताएं पूरी किए बिना संचालित हो रहा था तो उसकी जिम्मेदारी छात्रों पर नहीं डाली जा सकती। छात्रों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी फीस वापस नहीं की गई तो वे सामूहिक रूप से आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी विचार कर सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल
प्राधिकरण की सीलिंग कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि संस्थान के पास वास्तव में सभी आवश्यक अनुमतियां थीं, जैसा कि छात्रों को बताया जा रहा था, तो फिर भवन को सील क्यों किया गया? और यदि अनुमतियां नहीं थीं, तो छात्रों और अभिभावकों को आखिरी क्षण तक आश्वस्त कर वास्तविक स्थिति क्यों छिपाई गई?
स्कॉलर्स डेन की सीलिंग ने केवल एक कोचिंग संस्थान के संचालन पर ही नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के भरोसे पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है@शांतनु/INN
