एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 की सोशल साइंस की पुस्तक में भारतीय चुनाव व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई नए विषय शामिल किए गए हैं। पुस्तक में चुनाव आयोग की भूमिका, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), ईवीएम, वीवीपैट, आदर्श आचार संहिता और मतदाता जागरूकता अभियानों को विस्तार से समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के साथ-साथ मतदाता सूची तैयार करने, उसे अद्यतन रखने और लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करने का कार्य करता है।
पुस्तक के अनुसार, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक और त्रुटिरहित बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, जबकि मृत्यु, निवास परिवर्तन, दोहरे पंजीकरण या अन्य त्रुटियों की स्थिति में नाम हटाए जाते हैं। अंतिम मतदाता सूची जारी करने से पहले नागरिकों से दावे और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाती हैं। साथ ही, छात्रों को 1977 से 2024 तक के लोकसभा चुनावों के बाद बनी गठबंधन सरकारों का अध्ययन करने की गतिविधि भी दी गई है।
नई पुस्तक में भारतीय ज्ञान परंपरा को भी प्रमुखता दी गई है। छात्रों को ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के बारे में पढ़ाया जाएगा। पुस्तक में वेदों को भारतीय सभ्यता और संस्कृति की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए धर्म, दर्शन, शिक्षा, समाज, संगीत और जीवन मूल्यों के अध्ययन का प्रमुख स्रोत बताया गया है।
इसके अलावा, महिला आरक्षण और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर भी एक अलग अध्याय जोड़ा गया है। इसमें बताया गया है कि मतदान में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बावजूद राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है। स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया गया है कि शासन व्यवस्था में महिलाओं की अधिक भागीदारी से सकारात्मक बदलाव संभव हैं।
