मुरादाबाद। किसी भी शहर का वास्तविक गौरव उसकी ऐतिहासिक इमारतें नहीं, बल्कि वे महापुरुष होते हैं जिन्होंने अपने विचारों, संघर्ष और राष्ट्रसेवा से उस शहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाई हो। मुरादाबाद की ऐसी ही एक महान विभूति थे स्वर्गीय दाऊ दयाल खन्ना-स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रारंभिक सूत्रधारों में शामिल एक ऐसा व्यक्तित्व, जिनका योगदान आज भी भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में दर्ज है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी द्वारा मुरादाबाद के लाइनपार क्षेत्र का नाम “दाऊ दयाल खन्ना नगर” रखने की घोषणा के बाद एक बार फिर यह महान व्यक्तित्व चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय केवल एक क्षेत्र का नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक योगदान का सम्मान है जिसने मुरादाबाद का नाम राष्ट्रीय परिदृश्य पर स्थापित किया।
मुरादाबाद की धरती पर जन्मा एक राष्ट्रभक्त
नवंबर 1910 में मुरादाबाद के ऐतिहासिक अताई स्ट्रीट में जन्मे दाऊ दयाल खन्ना बचपन से ही राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। उन्होंने युवाओं को संगठित करने के उद्देश्य से यूथ लीग की स्थापना की और 1930, 1940 तथा 1942 के स्वतंत्रता आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन राष्ट्रसेवा के अपने संकल्प से कभी पीछे नहीं हटे।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और जीवनभर सार्वजनिक हित के कार्यों में सक्रिय रहे।
कांग्रेस के नेता, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि
दाऊ दयाल खन्ना भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते थे। वे कांठ विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। इनकी राजनीति सत्ता प्राप्त करने की नहीं, बल्कि समाज निर्माण की राजनीति थी। यही कारण था कि राजनीतिक विचारधारा अलग होने के बावजूद उनके व्यक्तित्व का सम्मान सभी दलों के नेता करते रहे।
मुरादाबाद से उठी वह आवाज, जिसने इतिहास की दिशा बदल दी
राम जन्मभूमि आंदोलन का इतिहास लिखते समय मुरादाबाद और दाऊ दयाल खन्ना का नाम विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1982 में मुरादाबाद के टाउन हॉल के निकट आयोजित हिंदू सम्मेलन में दाऊ दयाल खन्ना ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि, मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर के सम्मान एवं पुनर्स्थापना के लिए संगठित राष्ट्रीय अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा।
उस समय शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि मुरादाबाद से उठी यह आवाज आगे चलकर करोड़ों लोगों की आस्था का राष्ट्रीय आंदोलन बन जाएगी। उन्होंने तत्कलीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर भी इस विषय पर पहल करने का आग्रह किया था।
1984 में आंदोलन को मिला संगठित स्वरूप
वर्ष 1984 में मुजफ्फरनगर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में दाऊ दयाल खन्ना ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति का औपचारिक प्रस्ताव रखा। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ। समिति के अध्यक्ष महंत अवैद्यनाथ बनाए गए, जबकि दाऊ दयाल खन्ना को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। यही समिति आगे चलकर राम जन्मभूमि आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में शामिल हुई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने संबोधन में इस ऐतिहासिक तथ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ और दाऊ दयाल खन्ना ने मिलकर आंदोलन को नई दिशा दी थी।
मुख्यमंत्री योगी ने दिया ऐतिहासिक सम्मान
मुरादाबाद की जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दाऊ दयाल खन्ना ने अपना पूरा जीवन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और राष्ट्रसेवा को समर्पित कर दिया था।
उन्होंने घोषणा की कि मुरादाबाद के लाइनपार क्षेत्र का नाम बदलकर “दाऊ दयाल खन्ना नगर” रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस महान व्यक्तित्व के योगदान को हमेशा याद रखें।
मुरादाबाद में आज भी जीवित है उनकी विरासत
दाऊ दयाल खन्ना की विरासत आज भी उनके परिवार के माध्यम से मुरादाबाद में जीवंत है। उनके दो पौत्र डॉ. अनुराग खन्ना और डॉ. अविनाश खन्ना अपने परिवार के साथ शहर की मधुबनी कॉलोनी में निवास करते हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ईशान न्यूज़ नेटवर्क ने दोनों से विशेष बातचीत की।

डॉ. अनुराग खन्ना ने ईशान न्यूज़ से कहा –
“हमारे दादाजी ने कभी अपने लिए सम्मान या पहचान की अपेक्षा नहीं की। उनका पूरा जीवन राष्ट्रहित, समाज सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उनके नाम पर मुरादाबाद के एक प्रमुख क्षेत्र का नामकरण किया जाना केवल हमारे परिवार का नहीं, बल्कि पूरे मुरादाबाद का सम्मान है। हमें विश्वास है कि इससे नई पीढ़ी दादाजी के जीवन, उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को जानेगी।”

डॉ. अविनाश खन्ना ने अपने दादाजी कोई याद करते हुए ईशान न्यूज़ को बताया –
“हमारे दादाजी हमेशा कहते थे कि व्यक्ति से बड़ा उसका कर्तव्य और राष्ट्र होता है। उन्होंने हमें सेवा, सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति के संस्कार दिए। आज सरकार ने उनके योगदान को जिस सम्मान के साथ याद किया है, उससे पूरा परिवार भावुक है। हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने इतिहास के एक ऐसे महापुरुष को नई पीढ़ी से परिचित कराने का कार्य किया, जिनका योगदान लंबे समय तक अपेक्षित चर्चा नहीं पा सका।”
प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण भी बना सम्मान का प्रतीक
अयोध्या में श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान दाऊ दयाल खन्ना के परिवार को भी विशेष निमंत्रण प्राप्त हुआ था। परिवार ने इसे उनके ऐतिहासिक योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति और सम्मान का प्रतीक बताया।
दाऊ दयाल खन्ना : एक नजर में
- जन्म: नवंबर 1910, अताई स्ट्रीट, मुरादाबाद
- पहचान: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री
- स्वतंत्रता आंदोलन: 1930, 1940 और 1942 के आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी
- राजनीतिक जीवन: कांठ से विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री
- ऐतिहासिक योगदान: श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन की वैचारिक नींव रखने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल
- 1982: मुरादाबाद में आयोजित हिंदू सम्मेलन में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति का प्रस्ताव रखा
- 1984: श्री राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के महासचिव बने
- 1996: निधन
- 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुरादाबाद के लाइनपार क्षेत्र का नाम “दाऊ दयाल खन्ना नगर” रखने की घोषणा की।
दाऊ दयाल खन्ना केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि विचार, साहस और राष्ट्रसमर्पण की जीवंत मिसाल थे। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर लोकतांत्रिक राजनीति और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन तक उन्होंने जो भूमिका निभाई, वह उन्हें भारतीय जनजीवन की विशिष्ट विभूतियों की श्रेणी में स्थापित करती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उनके नाम पर मुरादाबाद के लाइनपार क्षेत्र का नामकरण वास्तव में इतिहास के प्रति सम्मान और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों को श्रद्धांजलि है। यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी देता है कि इतिहास उन्हीं को अमर करता है, जो अपना जीवन स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिए समर्पित करते हैं@INN
