अमरोहा। उत्तर प्रदेश की किसान संघर्ष महापंचायत में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल,पथिक सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुखिया गुर्जर ने 2019 के फर्जी ऑनर किलिंग कांड का हवाला देकर किसान नेता डॉ दिग्विजय भाटी की जिलाबदर कार्रवाई को बताया किसानों की आवाज दबाने की साजिश।

भारतीय किसान यूनियन के नेता डॉ. दिग्विजय भाटी को जिलाबदर किए जाने के विरोध में हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मंगरौला स्थित गंगा एक्सप्रेसवे पुल के नीचे बृहस्पतिवार को एक विशाल किसान संघर्ष महापंचायत का आयोजन किया गया।
महापंचायत में भारी संख्या में पहुंचे क्षेत्र के किसानों, नौजवानों और गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए पथिक सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुखिया गुर्जर ने अमरोहा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव, किसान, खेतिहर मजदूरों और औद्योगिक गलियारे से जुड़े भूमि विवादों जैसे जनहित के मुद्दों को प्रखरता से उठाने वाले किसान नेता डॉ. दिग्विजय भाटी पर यह दमनकारी कार्रवाई असल में क्षेत्र के किसानों की आवाज को दबाने का एक सोचा-समझा प्रशासनिक प्रयास है।

मुखिया गुर्जर ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि जिलाबदर की इस कार्रवाई पर उचित निर्णय लेने के लिए प्रशासन को 15 दिनों का समय दिया जाता है, यदि इस अवधि में कार्रवाई वापस नहीं हुई तो संगठन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे की रणनीति तय करेगा और वह स्वयं डॉ. भाटी के साथ हसनपुर विधानसभा में प्रवेश कर व्यापक आंदोलन चलाएंगे।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्य अतिथि मुखिया गुर्जर ने वर्ष 2019 में थाना आदमपुर क्षेत्र के एक चर्चित फर्जी ऑनर किलिंग कांड का उदाहरण भी पेश किया। उन्होंने कहा कि अमरोहा की पुलिस द्वेष भावना और षड्यंत्र के तहत किसी भी निर्दोष को अपराधी घोषित कर जेल भेज सकती है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण तत्कालीन आदमपुर थाना प्रभारी अशोक कुमार शर्मा द्वारा एक जीवित किशोरी को मृत दर्शाकर उसके पिता, भाई और रिश्तेदार को हत्या के झूठे आरोप में जेल भेजना था, जो करीब 15 महीने बाद जीवित मिली थी।
इस मामले में माननीय हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब मुख्य आरोपी तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ है और न्यायालय से उनकी कुर्की की अनुमति लेने की तैयारी चल रही है, जबकि नामजद शेष 10 पुलिसकर्मियों को पूर्व में ही निलंबित किया जा चुका है।
महापंचायत में वक्ताओं ने इसी ऐतिहासिक पुलिसिया चूक और साजिश का हवाला देते हुए वर्तमान में डॉ. दिग्विजय भाटी पर की गई कार्रवाई को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और किसान आंदोलन को कुचलने की साजिश बताया।
दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि दिग्विजय भाटी पर गुंडा एक्ट, सरकारी कार्य में बाधा डालने और कार से स्टंट करने जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं, जिसके तहत सीओ पंकज कुमार त्यागी की मौजूदगी में हसनपुर पुलिस ने बकायदा मुनादी कराकर उन्हें छह महीने के लिए जिला सीमा से निष्कासित किया गया है।
