देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आ रहा है। महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने कथित तौर पर संसद में आने वाले परिसीमन (Delimitation) विधेयक को समर्थन देने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, NCP (SP) इस मुद्दे पर सरकार के पक्ष में खड़ी हो सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
यदि सूत्रों की यह जानकारी सही साबित होती है, तो इसे विपक्षी राजनीति के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। NCP (SP) इंडिया गठबंधन की अहम सहयोगी पार्टियों में शामिल है और ऐसे में उसका यह रुख संसद के समीकरण बदल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी नई बहस को जन्म देगा।
परिसीमन विधेयक का उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना है। यह प्रक्रिया जनगणना के आंकड़ों के आधार पर की जाती है, ताकि बढ़ती आबादी के अनुरूप निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलित पुनर्गठन हो सके।
गौरतलब है कि इस वर्ष संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर जोरदार बहस हुई थी। उस दौरान विपक्ष ने एकजुट होकर विधेयक का विरोध किया था। मतदान में बिल के समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे, जबकि संवैधानिक संशोधन पारित कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी। पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि संख्या बल की कमी का मतलब हार नहीं है और भविष्य में इस मुद्दे पर फिर प्रयास किया जाएगा।
अब यदि NCP (SP) वास्तव में परिसीमन विधेयक के समर्थन में आती है, तो संसद में इस विषय पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। सभी की नजर अब पार्टी की आधिकारिक घोषणा और संसद में उसके अंतिम रुख पर टिकी हुई है।
