कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आखिर छात्रों का कसूर क्या है, जो शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर उनके सामने सुरक्षा बल खड़े कर दिए जाते हैं, उन्हें पीटा जाता है और उनका अपमान किया जाता है।
राहुल गांधी ने कहा कि देशभर के छात्र सिर्फ निष्पक्ष और भरोसेमंद शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि छात्र कोई अपराध नहीं कर रहे, बल्कि अपने अधिकारों की आवाज उठा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ सख्ती की जा रही है।
उन्होंने परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लाखों छात्र सालों तक मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले पेपर लीक की खबर उनके सपनों को तोड़ देती है। राहुल गांधी के मुताबिक, लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों ने छात्रों को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया है और कई मामलों में छात्रों ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि कभी भारत की शिक्षा प्रणाली दुनिया की बेहतरीन व्यवस्थाओं में गिनी जाती थी, लेकिन आज उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार इस व्यवस्था से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश परिवार मध्यम वर्ग और गरीब तबके से आते हैं, जो अपनी मेहनत की कमाई बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें निराशा और अन्याय का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 बार परीक्षा पत्र लीक होने की घटनाएं सामने आईं, लेकिन अब तक किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली। राहुल गांधी ने कहा कि यही वजह है कि देश का युवा सड़कों पर उतरकर अपने भविष्य की लड़ाई लड़ने को मजबूर है।
अपने बयान के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके छात्र और उसकी शिक्षा व्यवस्था हैं, लेकिन कुछ लोग इसे लगातार कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से पेपर लीक मामलों में कड़ी कार्रवाई करने और छात्रों को निष्पक्ष एवं पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था देने की मांग की।
