नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के दौरान जारी राजनीतिक टकराव बुधवार को भी देखने को मिला। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के सांसदों ने संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर सांसदों ने ‘चंदा चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाए और अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि में कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर केंद्र सरकार को घेरा।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को नीट परीक्षा के पेपर लीक से जोड़ते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान की सुरक्षा नहीं कर सके, उनसे देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उनके मुताबिक, यदि आस्था से जुड़े मामलों में लापरवाही हो सकती है तो परीक्षाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास के उस बयान पर भी अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस न होने पर दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। अखिलेश ने कहा कि यदि सरकार संसद में यह भरोसा देती कि प्रदर्शनकारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे, तो विवाद उसी समय समाप्त हो सकता था।
उधर, सपा सांसद डिंपल यादव ने भी राम मंदिर दान मामले को लेकर भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु भगवान राम के प्रति आस्था के साथ दान चढ़ाते हैं, लेकिन यदि उस धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आते हैं तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
डिंपल यादव ने विशेष जांच दल (SIT) के गठन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि केवल जांच समिति बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह मजबूती से उठाती रहेगी और सरकार से जवाब मांगती रहेगी।
