प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को एक और गोल्ड मेडल दिलाते हुए शानदार प्रदर्शन किया। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित महिला बॉक्सिंग की 54 किग्रा भारवर्ग स्पर्धा के फाइनल में प्रीति ने कनाडा की स्कार्लेट डेलगाडो को एकतरफा अंदाज में 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
फाइनल मुकाबले में प्रीति शुरुआत से ही पूरी तरह हावी रहीं। पहले राउंड में बढ़त बनाने के बाद उन्होंने दूसरे राउंड में भी आक्रामक खेल जारी रखा। सभी पांचों जजों ने दूसरे राउंड में भी प्रीति के पक्ष में 10-9 का स्कोर दिया, जबकि डेलगाडो को एक नॉकडाउन भी झेलना पड़ा। इसके बाद आखिरी राउंड में भी भारतीय मुक्केबाज ने दबदबा बनाए रखा और सर्वसम्मत फैसले से मुकाबला जीत लिया।
प्रीति पवार की यह सफलता लंबे संघर्ष और लगातार मेहनत का नतीजा है। वर्ष 2023 में सीनियर विश्व चैंपियनशिप के प्री-क्वार्टर फाइनल में हार के बाद उन्होंने खुद को संभाला और उसी साल हांगझोऊ एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतकर दमदार वापसी की। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने पेरिस ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई किया, लेकिन ओलंपिक से पहले हेपेटाइटिस-ए की वजह से उन्हें बड़ा झटका लगा।
बीमारी से उबरने के बाद भी प्रीति ने हार नहीं मानी। 2025 में उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल और एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता, जबकि स्पेन में आयोजित बॉक्सम एलीट इंटरनेशनल टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल हासिल किया। इन सफलताओं ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी, जिसका असर अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी देखने को मिला।
रिंग में अपने तेज़ और आक्रामक खेल के लिए मशहूर प्रीति निजी जीवन में बेहद शांत स्वभाव की हैं। मानसिक मजबूती बनाए रखने के लिए वह नियमित रूप से मेडिटेशन करती हैं। उनकी यही अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति आज उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडलिस्ट बना चुकी है।
