अमरोहा,09 अगस्त। पवित्र सावन मास के इस पावन अवसर पर हर-हर महादेव के साथ-साथ मोदी-योगी के जयकारों से गुंजायमान समूचा क्षेत्र ऊर्जा से आप्लावित हो उठा है। कांवड़ यात्रा के दौरान दिन-रात भक्ति-भाव में तल्लीन कांवड़ियों का अपार उत्साह देखते ही बनता है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष कांवड़ यात्रा में लगभग सत्तर प्रतिशत से अधिक भागीदारी (जेन जी) युवाओं की है, जो इस आध्यात्मिक आयोजन को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान कर रही है।विगत एक सप्ताह से गोमुख, गंगोत्री, हरिद्वार तथा बृजघाट जैसे परम पवित्र तीर्थ स्थलों से कांवड़ में पावन गंगाजल भरकर लाने वाले श्रद्धालुओं का अबाध आवागमन पिछले एक सप्ताह से निरंतर जारी है। कांवड़ियों के मुख से गूंजते ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ के जयघोष के साथ-साथ हाथों में तिरंगा थामे श्रद्धालुओं और ‘योगी-मोदी’ के जय-जयकार से समूचा वातावरण देशभक्ति और शिवभक्ति के अनूठे संगम से गुंजायमान है।

ये शिवभक्त अपनी इस दुर्गम यात्रा के माध्यम से देश में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, आपसी भाईचारे और अखंड शांति की मंगल कामना करते हुए अपने-अपने गंतव्य की ओर सतत अग्रसर हैं। इस भक्तिमय वातावरण में कांवड़ियों के मार्ग को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठन भी पूर्ण तत्परता से जुटे हुए हैं।

इसी शृंखला में सुप्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. बी.एस. जिंदल के मार्गदर्शन में युवाओं द्वारा जनसेवा की अनुकरणीय मिसाल पेश की जा रही है।दिल्ली विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त बलराम मौरल के नेतृत्व में जेन-जी युवाओं की समर्पित टीम कांवरियों की सेवा-सुश्रूषा में जुटी हुई है। उनके द्वारा विभिन्न शिविरों में कांवड़ियों की देखरेख और भंडारों में खाद्य सामग्री व राशन वितरण का कार्य अनवरत संभाला जा रहा है। शिवभक्तों की सेवा को परम धर्म मानते हुए यह टीम दिन-रात प्रयासरत है ताकि दूर-दराज से आ रहे श्रद्धालुओं को किंचित मात्र भी असुविधा का सामना न करना पड़े।

हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर स्टेट हाईवे-51 स्थित मंडी धनौरा पहुंचे उच्च शिक्षा प्राप्त युवा जगपाल सिंह ने यहां रविवार को विश्राम के दौरान बताया कि भौतिक सुख-सुविधाओं और अंधी प्रतिस्पर्धा की दौड़ में उलझी आज की दुनिया के समक्ष कांवड़ियों का जीवन-दर्शन एक सार्थक विकल्प प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि कांवड़िया प्रकृति का केवल उपभोग नहीं करता, बल्कि उसे पूजनीय मानकर उसकी आराधना करता है। नदियों से जल लेने से पूर्व प्रकृति माँ के प्रति आभार व्यक्त करना उनकी आस्था का मूल आधार है।

जनपद बुलंदशहर के योगेश कुमार ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और ग्रामीण समाज का जीवन दर्शन हमें सिखाता है कि न्यूनतम संसाधनों में भी अधिकतम प्रसन्नता के साथ जीवन व्यतीत किया जा सकता है। कांवड़ यात्रा से पता चलता है कि समाज में ‘मैं’ के बजाय ‘हम’ की सामुदायिक भावना सर्वोपरि है, जहाँ सुख-दुख हो या अन्य कार्य, पूरा समाज एक साथ मिलकर खड़ा होता है।

उन्होंने आगे कहा कि शिवभक्ति के साथ-साथ ‘जल, जंगल और जमीन’ की रक्षा को अपना परम धर्म मानने वाले कांवड़ियों की कठिन यात्रा आज पर्यावरण संकट और मानसिक तनाव से जूझती देश-दुनिया के लिए मार्गदर्शक दीपशिखा के समान है। कांवड़ियों ने कहा कि इस यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने में देश व प्रदेश सरकार तथा पुलिस प्रशासन की विशेष भूमिका की चौतरफा सराहना हो रही है।
कांवड़ यात्रा के दौरान देश की सीमाएं, प्रकृति और नागरिक सुरक्षित रहें, इसको लेकर जेन-जी युवा कांवड़िए विश्राम स्थलों में अपनी कृतज्ञता और विचार निरंतर व्यक्त कर रहे हैं। आस्था, जनसेवा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र-कल्याण की यह पावन त्रिवेणी वर्तमान में समूचे क्षेत्र को सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर कर रही है।
