अमरोहा/मुरादाबाद। ब्रजघाट से गंगाजल लेकर लौट रहे मुरादाबाद के बिलारी क्षेत्र के दो किशोर कांवड़ियों की सड़क हादसे में मौत के बाद अमरोहा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि 9 अगस्त की रात गजरौला थाना क्षेत्र में हादसा होने के बावजूद उन्हें समय से घटना की जानकारी नहीं दी गई और दोनों कांवड़ियों के शव पोस्टमार्टम के बाद अगले दिन उनके घर पहुंचने पर ही परिवार को पूरे घटनाक्रम की जानकारी हुई।
मामला बिलारी थाना क्षेत्र के गांव मकरंदपुर निवासी गौतम (16) पुत्र वेदराम और अनिल सैनी (17) पुत्र छत्रपाल की मौत से जुड़ा है। दोनों अपने साथियों के साथ बाइक से कांवड़ लेने ब्रजघाट गए थे। बताया गया कि 9 अगस्त की रात करीब आठ बजे गजरौला थाना क्षेत्र में गांव मोहम्मदाबाद के सामने उनकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी मौत हो गई।
24 घंटे तक परिवार को क्यों नहीं दी गई सूचना?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि हादसा अमरोहा जिले में हुआ, दोनों घायल कांवड़ियों को कथित तौर पर अस्पताल ले जाया गया, फिर भी उनके परिवारों तक तत्काल सूचना क्यों नहीं पहुंची?
परिजनों के मुताबिक, उन्हें हादसे की जानकारी समय रहते नहीं दी गई। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार देर शाम दोनों के शव जब गांव मकरंदपुर स्थित उनके घर पहुंचे, तब परिवारों में कोहराम मच गया।
परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस ने समय रहते सूचना दी होती तो परिवार के लोग अस्पताल पहुंच सकते थे और अपने बच्चों के उपचार एवं स्थिति की जानकारी ले सकते थे।
पुलिस के दावे और परिजनों के आरोप में अंतर
मामले में पुलिस सूत्रों की ओर से दावा किया जा रहा है कि दोनों कांवड़ियों की मौत मौके पर ही हो गई थी। वहीं, सामने आए परिजनों के बयान में कहा गया है कि उन्हें हादसे के बाद पुलिस के मौके पर पहुंचने और दोनों को सरकारी अस्पताल ले जाने की जानकारी दी गई थी तथा गंभीर हालत में मेरठ रेफर किए जाने की बात भी सामने आई।
यही विरोधाभास अब पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है। सवाल यह है कि आखिर हादसे के बाद वास्तविक घटनाक्रम क्या था और पुलिस ने परिजनों को सूचना देने में इतनी देर क्यों की?
दो परिवारों में मातम, गांव में उठ रहे सवाल
गौतम राजकीय इंटर कॉलेज में हाईस्कूल का छात्र था। उसके पिता वेदराम ई-रिक्शा चलाते हैं। वहीं अनिल सैनी भी हाईस्कूल का छात्र था और उसके पिता छत्रपाल हरियाणा में मजदूरी करते हैं। दोनों किशोर अपने साथियों के साथ कांवड़ लेने गए थे, लेकिन वापसी के दौरान हुए हादसे ने दो परिवारों के घरों में मातम पसरा दिया।
एक ही गांव के दो किशोरों की एक साथ मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है।
अमरोहा पुलिस की भूमिका पर उठ रहे पांच बड़े सवाल
- हादसे के तुरंत बाद मृतकों के परिजनों को सूचना क्यों नहीं दी गई?
- यदि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी तो अस्पताल और मेरठ रेफर किए जाने की बात कहां से सामने आई?
- घटना की जानकारी परिवारों तक पहुंचने में इतनी देरी क्यों हुई?
- क्या पुलिस ने हादसे के बाद पूरी प्रक्रिया और घटनाक्रम की जानकारी परिजनों को स्पष्ट रूप से दी?
- कांवड़ यात्रा जैसे संवेदनशील समय में दो नाबालिग कांवड़ियों की मौत के मामले में पुलिस की सूचना एवं समन्वय व्यवस्था पर जवाबदेही तय होगी या नहीं?
फिलहाल हादसे में दो किशोरों की मौत से ज्यादा गंभीर सवाल घटना के बाद की पुलिस कार्रवाई और परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया को लेकर खड़े हो रहे हैं। जरूरत है कि अमरोहा पुलिस पूरे घटनाक्रम का क्रमवार और पारदर्शी विवरण सार्वजनिक करे, ताकि हादसे की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके और परिजनों के उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके@शांतनु/INN
