पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए ट्रिब्यूनल के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उनकी प्रगति की समीक्षा की जरूरत बताई।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से ट्रिब्यूनल के कामकाज का विस्तृत डेटा मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि कितने ट्रिब्यूनल फिलहाल सक्रिय हैं, अब तक कितने मामलों की सुनवाई हुई और कितने मामलों का निपटारा किया जा चुका है। कोर्ट ने कहा कि अगर काम की रफ्तार संतोषजनक नहीं है, तो ट्रिब्यूनल के काम करने के तरीके में बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मामलों के निपटारे की धीमी गति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर इसी रफ्तार से सुनवाई चलती रही तो सभी अपीलों के निपटारे में काफी लंबा समय लग सकता है। इस पर पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने की बात कही।
जस्टिस बागची ने भी ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केवल अपील दायर कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि उन मामलों का वास्तविक परिणाम क्या निकल रहा है। अदालत ने ट्रिब्यूनल की संख्या, रोजाना सुने जाने वाले मामलों और उनके निपटारे की स्थिति की जानकारी मांगी है।
वहीं, वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के आधार पर राशन रोकने का सवाल भी सुनवाई के दौरान उठा। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि यह एक अलग कानूनी मुद्दा है और इसे हाईकोर्ट के समक्ष रखा जा सकता है।
अब सुप्रीम कोर्ट SIR से जुड़े ट्रिब्यूनल के प्रदर्शन और मामलों के निपटारे की प्रगति पर भी नजर रखेगा। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
