स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने राष्ट्रगीत के पूरे गायन पर आपत्ति जताई और इसे रोकने की कोशिश की।
इन आरोपों को कांग्रेस ने सिरे से खारिज कर दिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् को रोकने की बात नहीं कही थी। उनके मुताबिक, सोनिया गांधी केवल लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं।
जयराम रमेश ने बीजेपी के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि कांग्रेस मुख्यालय में निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत पूरा वंदे मातरम् गाया गया और किसी ने भी इसे बीच में रोकने की कोशिश नहीं की। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी कहा कि राष्ट्रगीत के दौरान कार्यक्रम में किसी तरह का व्यवधान नहीं हुआ।
नए नियमों को लेकर भी चर्चा
विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार ने वंदे मातरम् के गायन को लेकर नए प्रावधान और प्रोटोकॉल लागू किए हैं। सरकार की ओर से संसद में पारित किए गए संबंधित कानून के बाद राष्ट्रगीत के अपमान या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को लेकर कानूनी प्रावधानों को और सख्त किया गया है।
सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में आधिकारिक कार्यक्रमों और स्कूलों में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन को लेकर भी प्रोटोकॉल तय किया गया है। इसी बदलाव को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
शशि थरूर भी उठा चुके हैं सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के अनिवार्य गायन को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि किसी गीत के प्रति सम्मान केवल कानूनी प्रावधानों के जरिए पैदा नहीं किया जा सकता। उन्होंने लंबे कार्यक्रमों में लोगों के लगातार खड़े रहने जैसी व्यावहारिक दिक्कतों का भी जिक्र किया है।
फिलहाल स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में वंदे मातरम् को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
