प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ का जिक्र किए जाने के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी ने किसी नेता का नाम नहीं लिया था, लेकिन 24 घंटे के भीतर कुछ लोग खुद ही इस बहस के केंद्र में आ गए।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व जताया है। बीजेपी सांसद ने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस इस मुद्दे पर किस पक्ष के साथ खड़ी है।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया था। त्रिवेदी ने कहा कि मोदी सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाकर देश में प्रभावित इलाकों की स्थिति बदलने का काम किया है।
बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में देश के कई जिले नक्सल प्रभावित थे और नक्सली हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वह मनमोहन सिंह की नक्सलवाद को लेकर कही गई बात से सहमत है या फिर पी. चिदंबरम के मौजूदा रुख को सही मानती है।
दरअसल, 15 अगस्त को लाल किले से अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा था कि नक्सलवाद और माओवाद ने देश के लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था और अब यह समस्या अंतिम दौर में है। इसी दौरान उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ को पहचानने और उनसे सतर्क रहने की बात कही थी।
पीएम मोदी के इस बयान के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर राजनीतिक टकराव तेज होता नजर आ रहा है।
