मुरादाबाद। मस्जिद सराय पुख्ता और मदरसा फलाहे दारैन से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं, विदेशी संपर्कों, चंदा संग्रह, विदेश यात्राओं, विदेशी आर्थिक सहायता और धर्मांतरण संबंधी आरोपों की बहुस्तरीय एवं दस्तावेज-आधारित जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि मामले को केवल स्थानीय स्तर की जांच तक सीमित न रखते हुए वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, आयकर रिकॉर्ड, विदेशी यात्राओं, चंदे की रसीदों और उपलब्ध आव्रजन रिकॉर्ड को एक साथ जांचा जाए, ताकि वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
तारिक शम्सी की भूमिका पर उठे सवाल
शिकायत में मोहम्मद तारिक शम्सी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार वह मस्जिद सराय पुख्ता के सेक्रेट्री होने के साथ मदरसा फलाहे दारैन की 11 सदस्यीय कमेटी में भी सदस्य हैं।

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि तारिक शम्सी से जुड़ी संस्थाओं और उनसे संबद्ध व्यक्तियों की गतिविधियों की कानून के दायरे में विस्तृत जांच की जाए। विशेष रूप से यह सत्यापित किया जाए कि संबंधित संस्थाओं अथवा व्यक्तियों की गतिविधियों में किसी जमात या धार्मिक संगठन से जुड़ा कोई ऐसा कार्य तो नहीं है जो कानून के विपरीत हो।

सिर्फ संबंधों के आधार पर किसी को दोषी न माना जाए, बल्कि उपलब्ध रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और वास्तविक गतिविधियों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाए, ऐसी मांग भी शिकायत में की गई है।
11 सदस्यों के विदेश दौरों की हो पूरी पड़ताल
मदरसा फलाहे दारैन एवं मस्जिद कमेटी के 11 सदस्यों को लेकर शिकायतकर्ताओं ने जांच का दायरा और व्यापक करने की मांग की है।
मांग की गई है कि सक्षम प्राधिकरण कानून के अनुसार प्रत्येक सदस्य के :
पासपोर्ट और उपलब्ध इमिग्रेशन रिकॉर्ड की जांच करे।
विदेश यात्राओं की संख्या और अवधि का सत्यापन करे।
प्रत्येक यात्रा का घोषित उद्देश्य सामने लाया जाए।
यात्रा का खर्च किसने और किस स्रोत से वहन किया, इसकी जांच हो।
यदि किसी व्यक्ति या संस्था ने यात्रा प्रायोजित की तो उसकी वित्तीय क्षमता और स्रोत की भी जांच हो।
जहां कानूनन अनुमत हो, आयकर रिटर्न और घोषित आय की तुलना विदेश यात्राओं पर हुए खर्च से की जाए।
बैंक लेनदेन और उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों से यात्रा खर्च का मिलान किया जाए।
सवाल सीधा है, यदि विदेश यात्राओं पर बड़ी रकम खर्च हुई है तो उसका स्रोत क्या था और क्या वह संबंधित व्यक्तियों की घोषित आय एवं लेखा रिकॉर्ड में विधिवत दर्ज है?
बांग्लादेश से सऊदी और यूएई तक – विदेशी संपर्कों की जांच की मांग
शिकायत में बांग्लादेश, सऊदी अरब, यूएई, पाकिस्तान समेत कई देशों से कथित संपर्कों का उल्लेख किया गया है। मोहम्मद तारिक शम्सी की हालिया करीब एक माह की बांग्लादेश यात्रा का भी जिक्र करते हुए उसके उद्देश्य, खर्च, संपर्कों और प्रायोजन की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विदेश यात्राओं को लेकर यदि कोई संदेह है तो उसका समाधान अनुमान से नहीं बल्कि पासपोर्ट, इमिग्रेशन रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों से किया जाना चाहिए।
करीब एक करोड़ के खर्च का हिसाब भी मांगा
मदरसा फलाहे दारैन और मस्जिद से जुड़े निर्माण एवं अन्य कार्यों पर पिछले करीब दस वर्षों में लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा शिकायत में किया गया है।
अब मांग उठी है कि इस रकम का पूरा हिसाब सामने आए, पैसा कहां से आया, किसके माध्यम से आया और कहां खर्च हुआ?
इसके लिए निर्माण बिल, वाउचर, ठेकेदारों के भुगतान, बैंक खाते, नकद बही, चंदे की रसीद पुस्तिकाएं और उपलब्ध लेखा अभिलेखों का आपस में मिलान कराने की मांग की गई है।
विदेशी फंडिंग पर भी निगाह
शिकायतकर्ताओं ने विदेश से आने वाली किसी भी आर्थिक सहायता की वैधानिकता की जांच की मांग की है। इसमें धन के स्रोत, भारत में आने के माध्यम, संबंधित बैंक खातों और जहां लागू हो वहां एफसीआरए नियमों के अनुपालन की जांच शामिल है।
साथ ही चंदे की रसीदों और बैंक खातों का मिलान कर यह पता लगाने की मांग की गई है कि कहीं घोषित रकम और वास्तविक प्राप्तियों में कोई अंतर तो नहीं है।
कथित धर्मांतरण के आरोप भी जांच के घेरे में
शिकायत में गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को शिक्षा, रोजगार, इलाज, आवास, विवाह अथवा आर्थिक सहायता का कथित प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि यदि इन आरोपों के समर्थन में कोई पीड़ित, गवाह, वित्तीय रिकॉर्ड अथवा अन्य साक्ष्य मौजूद हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच की जाए और आरोप सही पाए जाने पर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।
सोना और ट्रैवल एजेंसियों से कथित संबंधों की भी जांच
शिकायत में विदेश यात्राओं के दौरान कथित रूप से सोना लाने तथा हज-उमराह से जुड़ी ट्रैवल एजेंसियों के साथ संभावित वित्तीय संबंधों की जांच की मांग भी की गई है।
इन आरोपों की सत्यता निर्धारित करने के लिए यात्रा रिकॉर्ड, सीमा शुल्क अभिलेख, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है।
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से कहा है कि मामले की जांच केवल कागजी शिकायत तक सीमित न रहे। संबंधित संस्थाओं के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, आयकर अभिलेख, चंदे की रसीदें, निर्माण खर्च, विदेशी यात्राएं और उपलब्ध विदेशी फंडिंग रिकॉर्ड को एक साथ रखकर जांच की जाए।
साथ ही पुलिस, आयकर विभाग, जीएसटी, वक्फ प्राधिकरण, आव्रजन और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध जांच की मांग की गई है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी तभी माना जा सकता है जब सक्षम जांच और न्यायिक प्रक्रिया में आरोप प्रमाणित हों।
