मुरादाबाद, 20 अगस्त। उत्तराखंड की सीमा से सटे मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा और कांठ क्षेत्र में गन्ने के घने खेतों को ढाल बनाकर आबादी पर हमला कर रहे तेंदुओं के आतंक से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित ‘स्मार्ट डिफेंस मॉडल’ तैयार किया है। मुख्यमंत्री के ‘आपदा में न्यूनतम जनहानि’ के संकल्प के तहत जिलाधिकारी एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मुरादाबाद ने उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (लखनऊ) के राहत आयुक्त व अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को 39.45 लाख रुपये का विशेष पायलट प्रोजेक्ट भेजा है। यह पूरी कार्ययोजना राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के तहत प्रस्तावित की गई है। इसके तहत 5 गांवों के 200 हेक्टेयर अति-संवेदनशील क्षेत्र को 24 घंटे रियल-टाइम निगरानी और अर्ली वार्निंग नेटवर्क से लैस किया जाएगा। वहीं, शासन स्तर पर भी विशेष सचिव अरुण प्रकाश के आदेशानुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण हेतु राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि से 33 करोड़ 92 लाख 95 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को जारी की गई है।
20 एआई कैमरे और सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर: खेतों में 24×7 पहरा
गन्ने के ऊंचे खेतों में छिपने वाले तेंदुओं को ट्रैक करने के लिए मुरादाबाद प्रशासन ने पारंपरिक गश्त के बजाय हाईटेक एआई नेटवर्क का खाका खींचा है। 200 हेक्टेयर क्षेत्र में 20 अत्याधुनिक एआई कैमरे (नाइट विजन व स्वचालित पहचान क्षमता युक्त) लगाए जाएंगे। इन कैमरों को खेतों के बीच 5 बड़े पोल और 15 मध्यम पोल पर स्थापित किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या से निपटने के लिए पूरा तंत्र सोलर आधारित होगा, जिसमें 20 सोलर बैटरी सिस्टम और 20 सोलर पैनल लगाए जाएंगे। साथ ही 20 एआई प्रोसेसिंग यूनिट, 20 हाई-स्पीड 4G कनेक्टिविटी मॉड्यूल, 20 एसएसडी स्टोरेज और 5 तड़ित चालक (लाइटनिंग प्रोटेक्शन यूनिट) इस सुरक्षा ग्रिड को मौसम की मार से सुरक्षित और निर्बाध रखेंगे।
कंट्रोल रूम से रियल-टाइम अलर्ट और ड्रोन से सर्च ऑपरेशन
इस पूरी प्रणाली की धड़कन एक केंद्रीकृत ‘इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम’ होगा। जैसे ही कोई तेंदुआ या संदिग्ध वन्यजीव एआई कैमरे के फ्रेम में आएगा, एआई बोर्ड तुरंत उस वीडियो का विश्लेषण कर लोकेशन और समय के साथ कंट्रोल रूम को लाइव अलर्ट भेजेगा। कंट्रोल रूम से तुरंत फील्ड में लगे पब्लिक एड्रेस (पीए) सिस्टम और 4 पोर्टेबल मेगाफोन के जरिए ग्रामीणों को तत्काल चेतावनी देकर सतर्क किया जाएगा। घने या दुर्गम खेतों में मानव टीम को खतरे में डालने से पहले 2.50 लाख रुपये की लागत वाला 1 विशेष सर्विलांस ड्रोन आसमान से तेंदुए की सटीक लोकेशन ट्रैक करेगा। इसके बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम 10 आधुनिक लैपर्ड रेस्क्यू केज और रात के ऑपरेशन के लिए 100 हाई-पावर टॉर्च की मदद से वैज्ञानिक प्रोटोकॉल (एसओपी) के तहत वन्यजीव को सुरक्षित रेस्क्यू करेगी।
₹39.45 लाख का पाई-पाई का बजट गणित
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) मुरादाबाद द्वारा तैयार विस्तृत लागत अनुमान के अनुसार, परियोजना में 10 वन्यजीव रेस्क्यू केज पर सर्वाधिक ₹10 लाख और 20 एआई कैमरों पर ₹7 लाख व्यय होंगे। एआई बोर्ड/प्रोसेसिंग यूनिट पर ₹6 लाख, सोलर पैनल पर ₹2.50 लाख, सर्विलांस ड्रोन पर ₹2.50 लाख, सोलर बैटरी बैकअप पर ₹2 लाख और 4G डेटा ट्रांसमिशन चिप पर ₹2 लाख की लागत आएगी। इसके अलावा मध्यम पोल पर ₹1.50 लाख, बड़े पोल पर ₹1 लाख, 100 हाई-पावर टॉर्च पर ₹1.50 लाख, सोलर लाइटिंग पर ₹1.50 लाख, मेगाफोन पर ₹1.20 लाख, एसएसडी स्टोरेज पर ₹1 लाख, लाइटनिंग प्रोटेक्शन पर ₹50 हजार, इंस्टॉलेशन चार्ज पर ₹50 हजार और पीए सिस्टम पर ₹25 हजार खर्च किए जाएंगे। कुल ₹39.45 लाख की यह परियोजना 10 हफ्तों के 6 चरणों (सर्वे, पोल व सोलर स्थापना, सिस्टम एकीकरण, कंट्रोल रूम टेस्टिंग, एसओपी ट्रेनिंग और लाइव डिप्लॉयमेंट) में धरातल पर उतरेगी।
सफल मॉडल बनते ही 50 किमी दायरे में होगा महा-विस्तार
प्रशासन के अनुसार यह 5 गांवों का पायलट प्रोजेक्ट एक आधारशिला है। पायलट चरण के परिणामों, प्रतिक्रिया समय और अलर्ट की सटीकता का विश्लेषण करने के बाद इसे कांठ और ठाकुरद्वारा तहसील के लगभग 50 किलोमीटर के विशाल दायरे में विस्तारित किया जाएगा। शासन स्तर से विशेष सचिव अरुण प्रकाश द्वारा जारी 33.92 करोड़ रुपये के बजट दिशा-निर्देशों के तहत भी यह अनिवार्य किया गया है कि एनडीएमए गाइडलाइन के अनुरूप केवल सर्वाधिक प्रभावित व संवेदनशील गांवों में ही आधुनिक आपदा उपकरणों की खरीद और तैनाती कर 31 मार्च 2027 से पहले कार्य पूरा किया जाए। मुरादाबाद का यह एआई पायलट प्रोजेक्ट पूरे प्रदेश के मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले जिलों के लिए नजीर बनेगा@जफर/INN
