मुरादाबाद। विधानसभा क्षेत्र-27 देहात में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच देहात सीट पर टिकट को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक हाजी नासिर कुरैशी की दावेदारी के बीच कांग्रेस नेता हाजी इकराम कुरैशी के समर्थन में आवाज उठने से गठबंधन की संभावित सीट शेयरिंग को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
भोजपुर निवासी और समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हसन कुरैशी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने सपा नेतृत्व से देहात सीट पर टिकट को लेकर अपनी राय सार्वजनिक की है। हसन कुरैशी ने मौजूदा सपा विधायक हाजी नासिर कुरैशी को दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस के हाजी इकराम कुरैशी को देहात सीट दिए जाने की मांग की है।
सपा के नासिर, कांग्रेस के इकराम – गठबंधन में सीट किसके खाते में?
राजनीतिक रूप से इस पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह है कि हाजी नासिर कुरैशी समाजवादी पार्टी से मौजूदा विधायक हैं, जबकि हाजी इकराम कुरैशी कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यदि आगामी चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा होता है तो देहात विधानसभा सीट किस पार्टी के हिस्से में जाएगी, इसको लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हसन कुरैशी के वीडियो ने इस बहस को और हवा दे दी है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता की राय को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की अपील की है और हाजी इकराम कुरैशी के पक्ष में टिकट की पैरवी की है।
हाजी इकराम के समर्थन में खुलकर आए हसन
हसन कुरैशी ने खुद को समाजवादी पार्टी का पुराना कार्यकर्ता बताते हुए पार्टी के लिए लंबे समय तक काम करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी की गतिविधियों के दौरान उन्होंने विभिन्न मामलों में जेल तक झेली है। उनका कहना है कि टिकट का फैसला केवल राजनीतिक समीकरणों को देखकर नहीं होना चाहिए, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता की भावनाओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
इसी क्रम में उन्होंने कांग्रेस के हाजी इकराम कुरैशी को देहात सीट से मौका दिए जाने की मांग रखी है।
नासिर कुरैशी पर गंभीर आरोप, पुष्टि नहीं
हसन कुरैशी ने वीडियो में सपा विधायक हाजी नासिर कुरैशी पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में हाजी नासिर कुरैशी का पक्ष सामने नहीं आया है। लिहाजा इन आरोपों को फिलहाल हसन कुरैशी के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
गठबंधन हुआ तो बदल सकता है देहात का समीकरण
देहात विधानसभा सीट पर सपा-कांग्रेस गठबंधन की स्थिति में टिकट का फैसला स्थानीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। एक ओर मौजूदा सपा विधायक हाजी नासिर कुरैशी की दावेदारी है, तो दूसरी ओर कांग्रेस के हाजी इकराम कुरैशी के समर्थक उन्हें मैदान में उतारने की मांग कर रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि गठबंधन की स्थिति में देहात सीट सपा के खाते में रहती है या कांग्रेस को दी जाती है? यदि सीट कांग्रेस के खाते में जाती है तो हाजी इकराम कुरैशी की दावेदारी मजबूत हो सकती है, जबकि सपा के खाते में रहने की स्थिति में मौजूदा विधायक हाजी नासिर कुरैशी की दावेदारी स्वाभाविक रूप से चर्चा में रहेगी।
लखनऊ के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल सीट बंटवारे और प्रत्याशी चयन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और गठबंधन के स्तर पर होना है। लेकिन हसन कुरैशी के वीडियो ने देहात विधानसभा सीट की सियासत में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
अब निगाह इस बात पर है कि आगामी चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन का फार्मूला क्या रहता है और देहात सीट सपा के हिस्से में आती है या कांग्रेस के खाते में जाती है। इतना तय है कि गठबंधन की स्थिति में इस सीट पर टिकट को लेकर सियासी संग्राम और तेज हो सकता है@जफर/INN
