चुनाव आयोग को लेकर सियासी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि आयोग के भीतर लिए जा रहे फैसलों को लेकर ही मतभेद सामने आ रहे हैं।
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कई फैसलों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इनमें मतदाता सूची और नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलाव भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, Form 6 में एक नया हिस्सा जोड़ा गया था, जिसमें नए मतदाताओं से उनके या उनके माता-पिता और दादा-दादी के पुराने SIR यानी Special Intensive Revision के दौरान मतदाता सूची में नाम होने से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।
विवेक जोशी ने कथित तौर पर इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि Form 6 एक वैधानिक फॉर्म है और इसमें बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी है। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के अलग-अलग फैसलों पर असहमति दर्ज की। इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी डेटा से जुड़े IT सिस्टम के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे भी बताए गए हैं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला तेज कर दिया। अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को एक व्यक्ति के जरिए चलाए जाने जैसे सवाल खड़े हो रहे हैं और उन्होंने दिल्ली व हरियाणा विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग भी की।
वहीं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है। अब इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और आगे होने वाली कानूनी-संवैधानिक कार्रवाई अहम रहेगी।
