मुरादाबाद, 29 सितंबर। गागन नदी के किनारे सरकारी भूमि पर कथित रूप से अवैध कॉलोनियां बसाए जाने का मामला सामने आया है। भारतीय किसान यूनियन (संविधान) ने आरोप लगाया है कि थाना मझोला क्षेत्र में सैकड़ों बीघा सरकारी भूमि को गरीब लोगों को बेचकर आफत नगरी और लाल नगरी के नाम से कॉलोनियां विकसित की गई हैं। संगठन ने मामले की जांच कराकर भूमाफियाओं के साथ ही कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
भारतीय किसान यूनियन (संविधान) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. रामेश्वर दयाल तुरैहा के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सोमवार को मंडलायुक्त कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी भूमि पर अवैध रूप से प्लाटिंग कर लोगों को प्लॉट बेचे गए और धीरे-धीरे वहां कॉलोनी का स्वरूप तैयार कर दिया गया। प्रदर्शन के बाद मंडलायुक्त, मुरादाबाद मंडल को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा गया।

सरकारी गाटों की भूमि बेचने का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि थाना मझोला क्षेत्र में गागन नदी के किनारे गाटा संख्या 3807/20, 2807/48 समेत अन्य गाटा संख्याओं की सरकारी भूमि मौजूद है। यूनियन का आरोप है कि इसी भूमि को गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेचकर आफत नगरी और लाल नगरी नाम से कॉलोनियां बसाई गई हैं। संगठन ने पूरे प्रकरण की राजस्व अभिलेखों के आधार पर जांच कराने की मांग की है, ताकि भूमि की वास्तविक स्थिति और उसके स्वामित्व का पता लगाया जा सके।
सड़क और लाइट की सुविधा विकसित करने का भी आरोप
किसान यूनियन ने आरोप लगाया कि कथित अवैध कॉलोनियों में लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सड़क और लाइट की व्यवस्था तक विकसित कर दी गई। संगठन का कहना है कि यदि भूमि सरकारी है तो वहां इस तरह निर्माण और कॉलोनी का विकास किसकी अनुमति से हुआ, इसकी जांच जरूरी है। यूनियन ने मुरादाबाद विकास प्राधिकरण सहित संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।

बारिश में जलभराव से बढ़ती है परेशानी
ज्ञापन में बरसात के दौरान इन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या का भी उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि गागन नदी के किनारे स्थित होने के कारण बारिश के दौरान पानी भर जाता है, जिससे वहां रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यूनियन ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा बरसात के समय मकान खाली कराने की कार्रवाई की जाती है, जबकि संगठन के अनुसार मूल रूप से सरकारी भूमि पर कथित अवैध कॉलोनी बसाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
यूनियन ने दावा किया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी बारिश के दौरान यहां रहने वाले लोगों को मकान खाली करने के लिए कहा गया। संगठन ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि सरकारी भूमि पर प्लाटिंग और निर्माण किस स्तर पर और किन लोगों की अनुमति अथवा संरक्षण में हुआ।
तीन प्रमुख मांगें रखीं
भारतीय किसान यूनियन (संविधान) ने मंडलायुक्त को सौंपे ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें उठाईं। संगठन ने कहा कि सरकारी भूमि पर कथित रूप से कॉलोनी बसाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। जिन लोगों से प्लॉट के नाम पर धनराशि ली गई है, जांच के बाद उनकी राशि वापस दिलाई जाए। इसके अलावा मामले में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका अथवा लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
संगठन ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने तथा प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा करने की मांग की है@शांतनु/INN
