मुरादाबाद। भारतीय जनता पार्टी में महानगर स्तर पर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सामने आई है। बीते एक सप्ताह के भीतर पार्टी से जुड़े दो नेताओं के इस्तीफों ने संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने के संकेत दिए हैं। पहले महानगर भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी एवं कार्यसमिति सदस्य राहुल सेठी ने महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला पर गंभीर आरोप लगाते हुए पद छोड़ दिया था। अब मानसरोवर वार्ड संख्या-9 के भाजपा पार्षद सुधीर सेठ ने महापौर विनोद अग्रवाल पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है।
लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों ने महानगर भाजपा की कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के भीतर सामने आ रही नाराजगी को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विकास कार्यों की अनदेखी से नाराजगी का दावा
मानसरोवर वार्ड-9 के पार्षद सुधीर सेठ ने महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला को संबोधित अपने इस्तीफे में महापौर विनोद अग्रवाल पर उनके वार्ड की अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में सफाई व्यवस्था से लेकर अन्य विकास कार्यों तक को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
सुधीर सेठ के मुताबिक, महापौर की ओर से उनके क्षेत्र की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से बनी इस स्थिति के कारण वह आहत हैं और इसी वजह से उन्होंने पार्षद पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। हालांकि, इन आरोपों पर महापौर विनोद अग्रवाल का पक्ष सामने आना बाकी है।
25 वर्षों से भाजपा से जुड़े होने का हवाला
अपने इस्तीफे में सुधीर सेठ ने पार्टी के साथ अपने लंबे जुड़ाव का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि वह पिछले 25 वर्षों से भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं। वर्ष 2023 में पार्टी ने उन्हें पार्षद पद का प्रत्याशी बनाया था, जिसके बाद वह चुनाव जीतकर नगर निगम पहुंचे।
उनकी नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब स्थानीय स्तर पर संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल की अपेक्षा की जाती है। एक निर्वाचित पार्षद की ओर से विकास कार्यों में अनदेखी का आरोप लगाया जाना अब महानगर की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
राहुल सेठी के इस्तीफे के बाद फिर बढ़ी चर्चा
सुधीर सेठ के इस्तीफे से पहले महानगर भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी और कार्यसमिति सदस्य राहुल सेठी भी अपना पद छोड़ चुके हैं। राहुल सेठी ने महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि संगठन को निजी कंपनी की तरह संचालित किया जा रहा है।
राहुल सेठी ने महानगर अध्यक्ष पर नगर निगम में उनकी पत्नी के नाम से ठेकेदारी किए जाने सहित अन्य गंभीर आरोप भी लगाए थे। ये आरोप राहुल सेठी की ओर से लगाए गए थे; इनकी स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना आवश्यक है।
संगठन की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
एक ओर संगठन के पदाधिकारी की ओर से महानगर अध्यक्ष के खिलाफ आरोप लगाए गए, वहीं दूसरी ओर भाजपा पार्षद ने महापौर की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए इस्तीफा दे दिया। दोनों घटनाओं में आरोपों के केंद्र अलग-अलग हैं, लेकिन इनके सामने आने से पार्टी की स्थानीय इकाई में समन्वय और संवाद को लेकर बहस तेज हो गई है।
राजनीतिक तौर पर भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सभी दल अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश में जुटेंगे। ऐसे में भाजपा के भीतर लगातार सामने आ रही नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती है।
2027 से पहले एकजुटता बनाए रखना चुनौती
मुरादाबाद महानगर भाजपा में हाल के दिनों में सामने आए इस्तीफों ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इन शिकायतों को किस तरह लेता है और संबंधित नेताओं के बीच मतभेद दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल, सुधीर सेठ के इस्तीफे और राहुल सेठी की ओर से पहले लगाए गए आरोपों के बाद महानगर भाजपा की अंदरूनी स्थिति पर निगाहें टिकी हैं। आगामी दिनों में संगठन की ओर से कोई पहल होती है या नहीं, यह तय करेगा कि विवाद शांत होता है अथवा पार्टी के भीतर असंतोष का मुद्दा आगे भी बना रहता है@शांतनु/INN
