अमरोहा(डा.महताब अमरोहवी)।जनपद के ऐतिहासिक गंगा मेले के उद्घाटन अवसर से मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री के पी मलिक,क्षेत्रीय सांसद कंवर सिंह तंवर तथा क्षेत्रीय विधायक राजीव कुमार तरारा की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है,जबकि निमंत्रण पत्र मुख्य अतिथि और क्षेत्रीय सांसद और विधायक की ओर से भेजा गया था।

निमंत्रण पत्र पर जनपद के नौगांवा सादात के सपा विधायक समरपाल सिंह और अमरोहा के विधायक महबूब अली के नाम भी गायब थे जिस के कारण समाजवादी पार्टी में भारी रोष है।बीती रात पतित पावनी माँ गंगा के किनारे पर लगा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक गंगा मेले का देवोत्थान एकादशी के मौके पर हवन यज्ञ के साथ दुग्धभिषेक और बनारस घाट की तर्ज पर महाआरती का शुभारम्भ किया गया।


इस दौरान 5100 दीप प्रज्वलित कर गंगा घाट को जगमगाया गया हर हर गंगे के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।इस अवसर पर मंडलायुक्त आंजनेय कुमार,डी आई जी मुनि राज, जिला पंचायत अध्यक्ष ललित तंवर ,हसन पुर विधायक महेंद्र सिंह खड़गवंशी,एम् एल सी हरी सिंह ढिल्लो ,जयपाल सिंह व्यस्त ,विधायक कुंदरकी ठाकुर रामवीर सिंह ,जिला अधिकारी निधि गुप्ता वत्स तथा पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद उपस्थित थे।


मुख्य अतिथि अतिथि व विशेष अतिथि नहीं हुए उद्घाटन में शामिल
मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री केपी मलिक तथा विशेष अतिथि क्षेत्रीय सांसद कँवर सिंह तंवर इस आयोजन में शामिल नहीं हुए जिस को लेकर जनपद में विभिन्न चर्चाएं हो रही हैं। श्रद्धालुओं का कहना हैं कि जिन्हों ने जनपद भर के लोगों को बुलाया, वह ही नहीं थे।


लोगों में चर्चा है की भाजपा की अंदरूनी गुट बाजी इसका मुख्य कारण है, अथवा जानबूझ कर इन जनप्रतिनिधियों को प्रशासन की ओर से नजरअंदाज किया गया है। बहरहाल ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रभारी मंत्री और क्षेत्रीय सांसद व विधायक इस महत्वपूर्ण आयोजन से गायब रहे हैं।

मेले में ठेकेदार जमकर कर रहे हैं अवैध वसूली
मेले को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रशासन खूब प्रचार कर रहा है, परन्तु गंगा किनारे लगने वाले टेंट सिटी और दुकानदारों से की जा रही लूट से बेखबर भी है। यहाँ के दुकानदारों से तय शुदा किराए से ज़्यादा वसूली की जा रही है जिस का बहुत विरोध किया जा रहा है। इन दुकानदारों ने जिला प्रशासन से अपनी परेशानी बताई लेकिन कोई हल नहीं निकला। कथित ठेकेदार द्वारा वसूली का क्रम जारी है, जिस से दुकानदारों में रोष है।


इसी प्रकार गंगा किनारे टेंट सिटी का प्रयोग किया गया जिस में एक टेंट का किराया पहले दिन का पांच हज़ार रूपए और दूसरे दिन का किराया तीन हज़ार रुए वसूला जा रहा है। जिस को लेकर ठेकेदारों से श्रद्धालुओं की काफी नोक झोंक भी हुई, लेकिन पुलिस प्रशासन के सामने बेबस होकर रह गए। एक श्रद्धालु का कहना है कि यहां आस्था के नाम पर लुटा जा रहा है।

जिले के अधिकांश पत्रकारों और मीडिया हाउस ने किया है मेले का बहिष्कार
उधर जिले के अधिकांश वरिष्ठ पत्रकार अपने लिए आबंटित शिविर न मिलने और मीडिया सेंटर की उचित व्यवस्था न होने से नाराज हैं। उनका कहना है कि आस्था के इस आयोजन को पूरी तरह प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। बहुत से मीडिया हाउस इस मेले के बहिष्कार संबंधी ज्ञापन जिला अधिकारी को दे चुके हैं, परन्तु इस दिशा में आज तक कोई भी कारवाई नहीं हुई नतीजतन बहुत से पत्रकार इस मेले की कवरेज भी नहीं कर रहे हैं।

कभी यह मेला बिना सरकारी अनुदान से लगता था। केवल जिला पंचायत का दखल रहता था, परन्तु अब सरकार ने इस मेले को पूर्ण रूप से सरकारी घोषित कर दिया है। जिस में न तो जन प्रतिनिधियों की कोई पूछ होती है, और न मीडिया को कोई महत्व दिया जाता है। विभिन्न अव्यस्थाओं के चलते जिला प्रशासन इस मेले को बहुत ऐतिहासिक बता रहा है, जबकि मेले में आज भी बहुत सी व्यवस्थाएं अधूरी हैं।
