19 दिसंबर 2025 को संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के तुरंत बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में एक पारंपरिक बैठक हुई। इस बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने एक साथ चाय पी और अनौपचारिक बातचीत की। यह परंपरा सदन के भीतर चलने वाली तीखी राजनीतिक बहस और मतभेदों के बीच व्यक्तिगत सौहार्द और लोकतांत्रिक मर्यादा को दर्शाती है।
प्रमुख नेताओं की उपस्थिति और प्रियंका गांधी की चर्चा
इस बैठक की सबसे खास बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वायनाड से नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की एक ही मेज पर मौजूदगी रही। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विभिन्न राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स भी शामिल हुए। सदन में हाल ही में हुए चुनाव सुधारों और नए विधेयकों पर चली तकरार के बाद, इन नेताओं का मुस्कुराते हुए संवाद करना चर्चा का विषय बना रहा।
सत्र की ऐतिहासिक कार्यक्षमता
स्पीकर ओम बिरला ने सत्र के समापन पर घोषणा की कि इस बार लोकसभा की कार्यक्षमता रिकॉर्ड 111% रही। 25 नवंबर से शुरू हुए इस सत्र के दौरान कुल 15 बैठकें हुईं, जिनमें से कई बार सदन निर्धारित समय से ज्यादा देर तक चला। इस दौरान सदस्यों ने शून्यकाल और नियम 377 के तहत जनहित के सैकड़ों मुद्दों को उठाया और सरकार से जवाब मांगा।
महत्वपूर्ण विधेयकों का पारित होना
सत्र के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए, जिनमें ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VB-G RAM G) विधेयक 2025 प्रमुख रहा। इस कानून ने मनरेगा का स्थान लिया है, जिसके तहत अब ग्रामीणों को साल में 125 दिन के काम की गारंटी और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा, बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक और चुनाव सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण बिलों पर भी गहन चर्चा के बाद मुहर लगाई गई।
संसदीय लोकतंत्र की मजबूती
समापन संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ने सभी सांसदों को सदन की गरिमा बनाए रखने और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच का यह संवाद ही भारतीय लोकतंत्र की असली ताकत है, जहाँ मतभेदों के बावजूद राष्ट्रहित के मुद्दों पर एकजुटता दिखाई देती है।
