महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव 2026 के लिए मतदान से पहले ही सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 को नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने के बाद, गठबंधन ने कुल 68 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल की। यह जीत दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर गठबंधन की तैयारी कितनी मजबूत है और कई वार्डों में विपक्ष उनके सामने उम्मीदवार तक खड़ा नहीं कर सका।
पार्टीवार प्रदर्शन और आंकड़े
इस निर्विरोध जीत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरी है। कुल 68 सीटों में से अकेले बीजेपी ने 44 सीटों पर कब्जा किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि अजीत पवार की एनसीपी (NCP) को 2 सीटों पर निर्विरोध सफलता मिली। यह आंकड़े बताते हैं कि गठबंधन के भीतर सीटों के समन्वय ने बेहतर परिणाम दिए हैं।
क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो सबसे बड़ी सफलता कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में मिली, जहाँ महायुति के 21 पार्षद बिना किसी विरोध के चुन लिए गए। इसके अलावा पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, पनवेल और अहिल्यानगर जैसे महत्वपूर्ण निगमों में भी महायुति के उम्मीदवारों को ‘वॉकओवर’ मिला है। शहरी क्षेत्रों में मिली यह बढ़त महायुति के लिए एक बड़े बूस्टर डोज के रूप में देखी जा रही है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आरोप
दूसरी ओर, महा विकास अघाड़ी (MVA) ने इस जीत को लेकर सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकारी मशीनरी और पुलिस बल का दुरुपयोग करके उनके उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। विपक्ष ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया है और राज्य चुनाव आयोग से उन निर्वाचन क्षेत्रों में जांच की मांग की है जहाँ बड़ी संख्या में नामांकन वापस लिए गए।
आगामी चुनाव और परिणाम
68 सीटों पर जीत के बावजूद, मुख्य मुकाबला अभी बाकी है। नगर निगम की शेष सीटों के लिए 15 जनवरी 2026 को मतदान होगा। चुनाव आयोग ने पारदर्शी चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इन चुनावों के अंतिम परिणाम 16 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे, जो यह तय करेंगे कि महाराष्ट्र के शहरों की सत्ता की चाबी किसके पास होगी।
