6 जनवरी 2026 को मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिकेय दीपम जलाने के मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाया। जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश (जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें पहाड़ी के शिखर पर स्थित पत्थर के स्तंभ (दीपाथून) पर दीप जलाने की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने डीएमके (DMK) सरकार और जिला प्रशासन द्वारा जताई गई कानून-व्यवस्था की चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया।
सांप्रदायिक सद्भाव: प्रशासन की दलील थी कि पास में दरगाह होने के कारण सांप्रदायिक तनाव हो सकता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को इसे दोनों समुदायों के बीच मतभेदों को दूर करने के एक अवसर के रूप में देखना चाहिए था।
राज्य-प्रायोजित अशांति: कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य प्रशासन का यह डर कि मंदिर की भूमि पर दीप जलाने से शांति भंग हो जाएगी, “हास्यास्पद” है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी अशांति तभी हो सकती है जब वह “राज्य प्रायोजित” (State-sponsored) हो।
