गजरौला। कभी ‘नन कांड’ से सुर्खियों में रहा गजरौला अब ‘जल कांड’ की वजह से दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है। रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट ने इलाके के भूजल को इतना प्रदूषित कर दिया है कि करीब 40 गांवों के लोग मौत के मुंह में जीने को मजबूर हैं। मैंगो बैल्ट के नाम से मशहूर इस क्षेत्र में अब कैंसर जैसी घातक बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में किसानों का बेमियादी धरना मंगलवार को 17वें दिन भी जारी रहा। हाड़ कंपकंपाती ठंड में शहबाजपुर डोर गांव में धरने पर बैठे किसान लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, कि इलाके के गांव गहरे संकट में डूबे हैं। मैंगो बैल्ट के सामने स्वास्थ्य के मोर्चे पर “कैंसर बैल्ट” जैसी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। किसान की ताकत से सत्ता के शिखर पर पहुंचे राजनेता आज उसी किसान की पुकार को अनसुना कर रहे हैं। देश रामभरोसे चल रहा है तो सरकार किस काम की?

राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह चौधरी ने कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों, सांसदों, विधायकों और प्रदूषण फैलाने वालों पर करारा प्रहार करते हुए कहा, “ईश्वर से प्रार्थना है कि ये लोग खुद वही जहरीला पानी पीकर वही पीड़ा झेलें, जो उन्होंने इलाके के लोगों को दी है। जब व्यवस्था अमानवीय हो जाती है, तो कर्म इंसाफ मांगते हैं।”

प्रमुख सचिव सिद्धू ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “बुजुर्गों की धरोहर – हमारी मिट्टी, पानी, हवा और बगद नदी की नैसर्गिकता को रासायनिक कारखानों ने नष्ट कर दिया। गंगा तट का स्वर्गलोक अब नरक बन गया। लोग भय से खामोश हैं। चाणक्य ठीक कह गए थे – जब तक एक मूर्ख जीवित है, धूर्त भूखे नहीं मरेंगे।”

प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने चेताया, “देश में नया स्कैम उभर रहा है अल्कलाइन वाटर का। जैसे 30 साल पहले रिफाइंड तेल ने घी-सरसों को बाजार से बाहर कर कैंसर फैलाया, वैसे ही अब पानी के जरिए लीवर-किडनी की बीमारियां परोसी जा रही हैं। चौधरी दलजीत सिंह ने कहा कि उदारीकरण ने दवाओं- अस्पतालों का बिजनेस खड़ा किया, इसके लिए देश को बीमार करना जरूरी था। अब पानी की बारी है। इस बार सजग रहें!”
धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि :
“गटर का पानी पीकर मर जाएं,
कुंभ की भगदड़ में मर जाएं,
रेलवे स्टेशन की भगदड़ में मर जाएं,
या खाद की लाइन में लगकर मर जाएं…
बस सवाल मत पूछिए!”
उन्होंने कहा कि गजरौला अस्पताल की जमीनी हकीकत व्यवस्था का आईना है – ट्रिलियन की बातें हवा में, बेड पर पीड़ा लेटी हुई है। ज्ञात हो कि किसान नेता कारखानों पर सख्त कार्रवाई और शुद्ध जल की मांग पर अड़े हैं। क्या सरकार जागेगी, या ये ‘जल कांड’ और बड़ा हादसा बनेगा? इलाके के लोग इंसाफ की राह देख रहे हैं।

शहबाजपुर डोर निवासी 54 वर्षीय किसान प्रकाश की रहस्यमई लंबी बीमारी के बाद सोमवार को मौत हो गई थी। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी समेत तमाम किसान शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए मृतक किसान के घर पहुंचे। मृतक किसान अपने पीछे पत्नी समेत पांच बेटियां और एक पुत्र छोड़ गए हैं।
इस अवसर पर मुख्य रूप से मोहित चौधरी,एस सी एस टी मोर्चा के रिंकू सागर, ओम प्रकाश दरोगा, प्रिंस चौधरी, सुरेश सिंह, मनोहर लाल, गोपाल सिंह, आजम चौधरी,आसिफ चौधरी, सोनू चौधरी, मलखान सिंह, ओमपाल सिंह, महिपाल सिंह आदि किसान मौजूद रहे।
