7 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों (stray dogs) की समस्या और सार्वजनिक सुरक्षा पर एक विस्तृत और अहम सुनवाई हुई। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की विशेष पीठ ने इस मुद्दे पर कई सख्त टिप्पणियां कीं।
“कुत्ते के मूड” पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी जानवर के व्यवहार का पहले से अंदाजा लगाना नामुमकिन है।
अनिश्चितता: जस्टिस विक्रम नाथ ने सवाल किया, “कोई भी यह नहीं पढ़ सकता कि कुत्ता किस समय काटने के मूड में है या नहीं। आप यह कैसे पहचानेंगे कि सुबह के समय कौन सा कुत्ता किस मूड में है?”।
सुरक्षा सर्वोपरि: कोर्ट ने जोर देकर कहा कि “बचाव इलाज से बेहतर है” (Prevention is better than cure) और सड़कों को कुत्तों से मुक्त रखा जाना चाहिए ताकि लोग बिना किसी डर के चल सकें।
कपिल सिब्बल और कोर्ट के बीच तीखी बहस
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पशु प्रेमियों का पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि यदि जानवरों के साथ सहानुभूति रखी जाए, तो वे हमला नहीं करते।
सिब्बल की दलील: उन्होंने उदाहरण दिया कि वे कई विश्वविद्यालयों (जैसे JNU) में गए हैं जहाँ कुत्ते रहते हैं, लेकिन उन्हें कभी किसी ने नहीं काटा।
कोर्ट का जवाब: इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “आप भाग्यशाली हैं कि आपको नहीं काटा गया… लेकिन लोग काटे जा रहे हैं, बच्चे मर रहे हैं और रेबीज से मौतें हो रही हैं”।
स्कूलों और अस्पतालों से कुत्तों को हटाने का आदेश
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
संस्थानों की सुरक्षा: स्कूलों, अस्पतालों, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और कोर्ट परिसरों को पूरी तरह कुत्ता-मुक्त रखने का निर्देश दिया गया है।
नॉन-रिलीज पॉलिसी: कोर्ट ने आदेश दिया कि इन संस्थानों से पकड़े गए कुत्तों को स्टरलाइजेशन और टीकाकरण के बाद वापस उसी जगह पर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें स्थायी रूप से आश्रय स्थलों (shelters) में रखा जाएगा।
सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कुत्तों का खतरा केवल काटने तक सीमित नहीं है।
सड़क सुरक्षा: कुत्ते अक्सर सड़कों पर वाहनों और साइकिलों के पीछे भागते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं।
न्यायाधीशों के साथ हादसा: कोर्ट ने साझा किया कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान में दो न्यायाधीशों के साथ आवारा जानवरों के कारण सड़क हादसे हुए, जिनमें से एक जज को रीढ़ की गंभीर चोट आई है।
प्रशासन को फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और नगर निकायों द्वारा ‘पशु जन्म नियंत्रण’ (ABC) नियमों को सही ढंग से लागू न करने पर नाराजगी जताई।
अदालत ने कहा कि यह न केवल प्रशासनिक उदासीनता है बल्कि सार्वजनिक स्थानों को खतरों से बचाने में एक “प्रणालीगत विफलता” (Systemic Failure) है।
