मुरादाबाद। महानगर में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विभागीय अधिकारियों पर 80 वर्षीय बुजुर्ग विधवा महिला से कथित रूप से मानसिक उत्पीड़न, अवैध वसूली और गलत बिजली बिल थोपने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता ने मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह 26 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह करने को मजबूर होगी।
मामला थाना मुगलपुरा क्षेत्र के जीलाल स्ट्रीट मंडी चौक निवासी श्रीमती सरला देवी से जुड़ा है। पीड़िता के अनुसार उनके मकान का बिजली कनेक्शन वर्षों से वैध है और पहले 3 किलोवाट का लोड स्वीकृत था, जिसे बिना किसी नोटिस के बढ़ाकर 5 किलोवाट कर दिया गया। यही नहीं, बाद में जबरन 7.5 किलोवाट का भार दर्शाते हुए भारी-भरकम और कथित रूप से गलत बिल थमा दिया गया।
पीड़िता का आरोप है कि वह सौर ऊर्जा योजना के तहत अपने घर पर 5 केवी का सोलर पैनल भी लगवा चुकी हैं, इसके बावजूद विभाग मनमाने ढंग से बिजली खपत और भार दिखाकर हजारों रुपये का बिल भेज रहा है। महिला का कहना है कि जहां उसका मासिक उपभोग मात्र 53 यूनिट है, वहीं 7.5 किलोवाट का भार दिखाकर करीब 5000 रुपये का फर्जी बिल वसूली के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि बिजली विभाग और विद्युत उपकेंद्र टाउनहाल से जुड़े कुछ कर्मचारी कथित रूप से 20 हजार रुपये की अवैध मांग कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पैसे देने पर ही बिल “सही” किया जाएगा, अन्यथा अगली बार 10 किलोवाट का लोड जोड़कर और बड़ा बिल भेज दिया जाएगा।
पीड़िता का कहना है कि वह बुजुर्ग, विधवा और बीमार महिला है, इसके बावजूद उसकी कोई सुनवाई नहीं की जा रही। कई बार विभागीय दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
अब मजबूर होकर महिला ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर साफ कहा है कि यदि 20 जनवरी 2026 तक गलत बिलों में सुधार नहीं हुआ, तो वह 26 जनवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग मुरादाबाद और संबंधित JE व SDO की होगी।
यह मामला न सिर्फ बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी सिस्टम में एक बुजुर्ग, बेसहारा महिला को अपनी आवाज़ सुनाने के लिए आत्मदाह जैसी चेतावनी तक देनी पड़ रही है।
