बगद नदी में माइक्रोप्लास्टिक व जहरीले रसायनों से 40 से अधिक गांव प्रभावित, किसान पंचायत में सरकार पर तीखा हमला
अमरोहा।उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के गजरौला औद्योगिक क्षेत्र में रासायनिक कारखानों से फैल रहे प्रदूषण के विरोध में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गया। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में किसान गंगा की सहायक बगद नदी सहित क्षेत्र के जलस्रोतों में खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक और जहरीले रसायनों की मौजूदगी को लेकर गहरी चिंता जता रहे हैं।
किसानों का कहना है कि गजरौला औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला दूषित अपशिष्ट बगद नदी को एक सदानीरा नदी से जहरीले नाले में तब्दील कर चुका है। मंडी धनौरा ब्लॉक के सुजमना गांव की काली ढाब से निकलने वाली यह नदी पिछले एक दशक से लगातार प्रदूषण का दंश झेल रही है। आरोप है कि रासायनिक कारखानों ने अवैध रूप से ग्राम समाज की जमीनों, जोहड़ों और तालाबों पर कब्जा कर लिया है, जिससे 40 से अधिक गांवों की खेती, मिट्टी और जलस्रोत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

किसानों के अनुसार जहरीले पानी के कारण खेतों में केंचुए और अन्य सूक्ष्म जीव समाप्त हो चुके हैं, फसलें नष्ट हो रही हैं और ग्रामीणों में गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। धरना स्थल पर आयोजित किसान पंचायत में भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान पर तीखा हमला बोला, जिसमें उन्होंने बढ़ती पैदावार के आधार पर किसानों को खुशहाल बताया था।
नरेश चौधरी ने कहा कि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। गजरौला और गंगेश्वरी क्षेत्र की स्थिति भयावह है। उन्होंने आरोप लगाया कि नकली और अपंजीकृत एग्रोकेमिकल्स का एक संगठित नेटवर्क किसानों, मिट्टी और पर्यावरण को तबाह कर रहा है। यह केवल पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक अपराध भी है।उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री को गजरौला और गंगेश्वरी क्षेत्र के गांवों का स्थलीय निरीक्षण करने का खुला निमंत्रण देते हुए कहा कि तभी वास्तविक हालात सामने आ सकेंगे। चौधरी ने चेतावनी दी कि अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार के बावजूद कृषि क्षेत्र की सुस्ती ग्रामीण भारत की कमजोर स्थिति को उजागर कर रही है। किसान कर्ज के जाल में फंसकर अपनी जमीनें बेचने को मजबूर हैं, खेती की लागत बढ़ती जा रही है जबकि फसलों के दाम लगातार गिर रहे हैं। वहीं, औद्योगिक घरानों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जा रहे हैं।
किसान पंचायत में यह निर्णय लिया गया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गारंटी कानून, नकली रसायनों को संगठित आर्थिक अपराध घोषित करने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और किसान कर्जमुक्ति सहित सभी मांगों के समर्थन में गांव-गांव किसान पंचायतें आयोजित की जाएंगी। किसानों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान गठित हाई पावर कमेटी और कृषि मामलों की संसदीय स्थायी समिति से भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की।किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सख्त नीतिगत हस्तक्षेप, प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन और कड़ा प्रदूषण नियंत्रण नहीं किया गया, तो क्षेत्र के जलस्रोतों में माइक्रोप्लास्टिक एक गंभीर और स्थायी संकट बन जाएगा। कभी स्वच्छ पानी का भरोसा माने जाने वाला गंगा तटवर्ती कॉरिडोर भी अब प्रदूषण की चपेट में है।
आंदोलनकारी किसानों ने स्पष्ट किया कि ठोस कार्रवाई होने तक धरना जारी रहेगा। हालांकि प्रशासन द्वारा पानी और मिट्टी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, लेकिन किसान किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं। इस अवसर पर भाकियू संयुक्त मोर्चा के साथ क्षेत्र की विभिन्न किसान जत्थेबंदियों की मौजूदगी भी उल्लेखनीय रही।
