मोज़ाम्बिक की मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व राजनेता ग्राका माचेल (Graça Machel) को वर्ष 2025 के लिए इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार के लिए चुना गया है।
पुरस्कार राशि: ग्राका माचेल को सम्मान के तौर पर ₹1 करोड़ की नकद राशि, एक ट्रॉफी और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।
चयन प्रक्रिया: उनका चयन पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता वाली एक अंतरराष्ट्रीय जूरी द्वारा किया गया।
उद्देश्य: यह पुरस्कार उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सशक्तिकरण और कठिन परिस्थितियों में किए गए उनके मानवीय कार्यों के लिए दिया जा रहा है।
ग्राका माचेल के जीवन की उपलब्धियां
जूरी ने उनके दशकों लंबे संघर्ष और सामाजिक बदलाव के प्रयासों को इस सम्मान का आधार बनाया है:
शिक्षा क्रांति: मोज़ाम्बिक की पहली शिक्षा मंत्री (1975-1989) के रूप में उन्होंने स्कूली नामांकन को लड़कों के लिए 40% से बढ़ाकर 90% और लड़कियों के लिए 75% से अधिक करने में सफलता पाई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बच्चों की सुरक्षा: 1996 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के लिए “द इम्पैक्ट ऑफ आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट ऑन चिल्ड्रन” नामक एक ऐतिहासिक रिपोर्ट तैयार की, जिसने युद्ध क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा के प्रति दुनिया का नजरिया बदल दिया।
संस्थागत नेतृत्व: वह ‘द एल्डर्स’ (The Elders) की संस्थापक सदस्य हैं और बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक पहल ‘गर्ल्स नॉट ब्राइड्स’ (Girls Not Brides) की स्थापना में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।
महिला सशक्तिकरण: उन्होंने 2010 में ग्राका माचेल ट्रस्ट की स्थापना की, जो अफ्रीका में महिलाओं के नेतृत्व, खाद्य सुरक्षा और सुशासन को बढ़ावा देता है।
अन्य सम्मान: उनके योगदान के लिए उन्हें 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सर्वोच्च सम्मान WHO गोल्ड मेडल से भी नवाजा जा चुका है।
एक अद्वितीय वैश्विक व्यक्तित्व
ग्राका माचेल के नाम एक दुर्लभ रिकॉर्ड है—वह दुनिया की एकमात्र ऐसी महिला हैं जो दो अलग-अलग देशों की ‘प्रथम महिला’ (First Lady) रही हैं। वह मोज़ाम्बिक के पूर्व राष्ट्रपति समोरा माशेल और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला की पत्नी रह चुकी हैं।
यह पुरस्कार भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की याद में 1986 से हर साल शांति और मानवता के लिए काम करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को दिया जाता है।
