मुरादाबाद। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर घोषित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में गुरुवार को सिविल लाइन स्थित अंबेडकर पार्क में विभिन्न मजदूर और किसान संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में श्रमिक, किसान प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की श्रम, कृषि और आर्थिक नीतियों के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए नारेबाजी की और बाद में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। वक्ताओं का कहना था कि मौजूदा आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का सीधा असर मजदूरों, किसानों और आम जनता की आजीविका पर पड़ रहा है।
संयुक्त मंच से उठी आवाज
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नीतिगत बदलावों से रोजगार की सुरक्षा, वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना था कि श्रम सुधारों और नई श्रम संहिताओं को लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर श्रमिक संगठनों और हितधारकों से संवाद किया जाना चाहिए।
मंच से पुराने श्रम कानूनों के स्थान पर लागू नई श्रम संहिताओं को लेकर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि इन बदलावों से काम के घंटे, वेतन सुरक्षा और संगठन की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे प्रभावित हो सकते हैं। संगठनों ने मांग की कि श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए श्रम कानूनों की पुनर्समीक्षा की जाए और संवाद प्रक्रिया को मजबूत बनाया जाए।
किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कृषि नीतियों, बिजली क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी को प्रमुख मुद्दा बताया। उनका कहना था कि किसानों की आय और उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए ठोस गारंटी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। साथ ही बिजली क्षेत्र में किसी भी बड़े बदलाव से पहले किसानों और उपभोक्ताओं से व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।
सभा में सार्वजनिक उपक्रमों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को लेकर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती कर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने ग्रामीण रोजगार से जुड़ी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट और निरंतरता सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिरता के बिना आर्थिक संतुलन संभव नहीं है।
प्रदर्शन के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रमुख रूप से श्रमिक हितों की रक्षा के लिए श्रम नीतियों की पुनर्समीक्षा, ग्रामीण रोजगार योजनाओं को सुदृढ़ बनाने, किसानों के लिए एमएसपी की गारंटी, बिजली क्षेत्र में नीतिगत बदलावों पर पुनर्विचार तथा सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने की मांग शामिल रही।
प्रदर्शन में सीटू, एटक, एआईयूटीयूसी, उत्तर प्रदेश किसान सभा, उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।
