अमरोहा। भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर विवाद तेज हो गया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने इसे किसानों के लिए विनाशकारी बताया है। उन्होंने शुक्रवार को अमरोहा के गजरौला में शहबाजपुर डोर गांव के नाईपुरा क्षेत्र में दूषित पानी को लेकर 55 दिनों से अधिक समय से बेमियादी धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि को अमेरिकी सब्सिडी वाले उत्पादों के लिए खोल देगा, जिससे खेती-किसानी इतिहास में दफ़न हो जाएगी।
नरेश चौधरी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कृषि मंत्री बाबू जगजीवन राम के समय से अमेरिका, भारत पर इसके लिए दबाव बना रहा था, और अब यह दबाव सफल हो गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी किसान इस समझौते का शैंपेन पीते हुए जश्न मना रहे हैं, जबकि भारत में किसान राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री जयंत चौधरी (राष्ट्रीय लोक दल अध्यक्ष) के हालिया गजरौला दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि मंत्री ने समझौते को किसानों के लिए फायदेमंद बताया, लेकिन धरने पर बैठे किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया और रासायनिक कारखानों द्वारा छोड़े गए ज़हरीले रासायनिक उत्सर्जनों से जल-जंगल-जमीन दूषित हो जाने के पत्रकारों के सवालों से बचते रहे।

नरेश चौधरी ने राजनीतिक दलों पर तंज कसते हुए कहा कि चुनावों में भारी खर्च करने वाली पार्टियां, जीतने के बाद जनता की बजाय अपने लाभ के लिए काम करती हैं। उन्होंने लोकतंत्र में जनता की सर्वोच्चता पर जोर देते हुए कहा कि नेता मंच पर अवतार बनते हैं, लेकिन जनता ही अंतिम फैसला करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीति नारों से चलेगी या नीतियों से? साथ ही, निष्पक्ष चुनाव के लिए डिजिटल वोटिंग और ओटीपी आधारित सुरक्षा की मांग की।
अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने कहा कि शहबाजपुर डोर में किसान दूषित पानी और रासायनिक प्रदूषण के खिलाफ धरना जारी रखने व आर-पार का ऐलान कर चुके हैं। देशभर में किसान संगठनों ने इस समझौते के खिलाफ विरोध तेज किया है, जबकि सरकार का दावा है कि संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्र सुरक्षित रखे गए हैं। यह मुद्दा किसानों की आजीविका और राजनीतिक विश्वासनीयता पर गहरा सवाल खड़ा कर रहा है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से ओम प्रकाश सिंह, होमपाल सिंह, गंगाराम सिंह, पृथ्वी सिंह, रामप्रसाद सिंह, मंसूर अली हरिद्वार सिंह,सोमपाल सिंह, सुरेश चन्द सिंह समेत तमाम किसान मौजूद रहे।
