अमरोहा। जनपद के गजरौला क्षेत्र में बगद नदी के आसपास बसे नाईपुरा, बसैली और शहबाजपुर डोर गांवों में जल प्रदूषण का संकट गहराता जा रहा है। शुक्रवार को नमामि गंगे परियोजना की टीम छह सदस्यीय जांच समिति की अध्यक्षा श्रीमती चंद्रकांता (पीसीएस) के साथ प्रभावित गांवों में पहुंची और हालात का जायजा लिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके का भूजल पीला, बदबूदार और दूषित हो चुका है। लोगों का कहना है कि पीने के पानी से बीमारियां बढ़ रही हैं, दुधारू पशु मर रहे हैं और फसलें प्रभावित हो रही हैं। कई परिवारों ने गंभीर रोगों के मामलों में वृद्धि की आशंका जताई है। ग्रामीणों ने टीम के सामने पानी के नमूने, सूखती फसलें और बीमार पशुओं की स्थिति दिखाते हुए ठोस कार्रवाई की मांग की।

62वें दिन भी जारी धरना
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शहबाजपुर डोर में चल रहा बेमियादी धरना शुक्रवार को 62वें दिन में प्रवेश कर गया। किसान नेता लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक दूषित जल की समस्या का स्थायी समाधान, भूजल की शुद्धि और कथित रूप से प्रदूषण फैलाने वाले रासायनिक कारखानों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

भाकियू संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि यह केवल पानी का संकट नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने युवाओं में बढ़ती ‘इको एंजायटी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय तक पर्यावरणीय संकट मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने आरोप लगाया कि दूषित पानी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर विधानसभा में अपेक्षित चर्चा नहीं हो रही है। वहीं अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडलाध्यक्ष एहसान अली ने दावा किया कि बगद नदी के किनारे बड़ी आबादी दूषित जल पीने को मजबूर है और सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।

प्रशासन पर टिकी निगाहें
धरने में ओम प्रकाश दरोगा, अमरजीत देओल, गुरमीत सिंह, होमपाल सिंह, अशोक कुमार, विजय सिंह, गणपत सिंह, समसुद्दीन, ज्ञानी जी, पृथ्वी सिंह, समरपाल सैनी सहित कई किसान मौजूद रहे।

नमामि गंगे टीम ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं और जांच रिपोर्ट शासन को भेजने का आश्वासन दिया। अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन अब केवल विरोध नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। उनका साफ कहना है—जब तक साफ पानी और सुरक्षित जीवन का भरोसा नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।
