अमरोहा। गजरौला के नाईपुरा इलाके में दूषित जल की समस्या पिछले दो महीनों से गंभीर बनी हुई है। स्थानीय किसानों का आरोप है कि रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट के कारण भूजल प्रदूषित हो गया है। गांवों में हैंडपंप और बोरिंग का पानी पीला और बदबूदार हो चुका है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई शुरू होने की बात कही जा रही है, लेकिन किसानों का कहना है कि हालात जस के तस हैं। उनका आरोप है कि सरकार और तंत्र की चुप्पी “भैंस के आगे बीन बजाने” जैसी साबित हो रही है।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शहबाजपुर डोर में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 63वें दिन में प्रवेश कर गया। बड़ी संख्या में युवा किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर धरना स्थल पहुंचे और समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। आंदोलनकारी दूषित जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा की मांग पर अडिग हैं।

इस दौरान प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई। भाकियू नेता नरेश चौधरी ने कहा कि ऐसा कोई भी समझौता कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका के लिए घातक साबित हो सकता है। उनका कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे कृषि-प्रधान क्षेत्र में छोटे और सीमांत किसान अमेरिकी सब्सिडी प्राप्त बड़े किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, जिससे संकट और गहराएगा।

अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एहसान अली ने चेतावनी दी कि दूषित जल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। रोजगार के अवसर घट रहे हैं, बीमारियां बढ़ रही हैं और युवाओं में “इको-एंजायटी” जैसी मानसिक समस्याएं उभर रही हैं, जिससे सामाजिक अस्थिरता का खतरा बढ़ सकता है।

किसान नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्रियों चरण सिंह और मनमोहन सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कृषि बाजारों को विदेशी उत्पादों के लिए खुला नहीं छोड़ा, क्योंकि इससे किसानों की रीढ़ कमजोर होती है।
प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान और वैस्ट यूपी प्रभारी हरकेश राणा ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित व्यापार समझौते की पुनर्समीक्षा की मांग की।

आंदोलनकारी किसान 22 फरवरी को मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर अपनी पीड़ा उन तक पहुंचाने की रणनीति बना रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दूषित जल समस्या और कृषि सुरक्षा के मुद्दे पर ठोस कदम उठाएंगे।
धरना स्थल पर शानू चौधरी, होमपाल सिंह, गंगाराम सिंह, मंसूर अली, विजय सिंह, सुरेश चंद्र, रामचंद्र सिंह, समरपाल सिंह, सुखा खान, बाबुद्दीन, चंद्रपाल सिंह, बाबू अली, शमशाद चौधरी, रामफल सिंह, देवेंद सिंह, ओम प्रकाश सिंह, रामप्रसाद सिंह और पृथ्वी सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
