अमरोह। जिले के नाईपुरा और बगद नदी के आसपास तमाम गांवों से धरना स्थल पर पहुंचे किसानों ने रविवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पुतला फूंककर विरोध प्रदर्शन किया।

किसानों ने कहा कि कैमिकल युक्त वातावरण और ज़हरीला हो चुका भूमिगत जल और बीमारियां, अन्नदाताओं के लिए स्थाई संकट बनता जा रहा है।औद्योगिक कैमिकल का कचरा ढो रही बगद नदी जिसे जीवनदायिनी भी कहा जाता था, सदानीरा बगद नदी में मछलियां, जलीय जीव जन्तु, तथा जलस्तर का संतुलन बना रहता था , औद्योगिक कचरे सिसकते हुए जंगल और ज़हरीले हवा -पानी कैंसर ऐसा घाव छोड़ रहे हैं,जिसकी भरपाई कोई भी आर्थिक विकास नहीं कर सकता। यह दुर्भाग्य है कि बीते समय से राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) , प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मानवाधिकार आयोग, जैसे तमाम सशक्त संस्थानों को कमजोर, उद्देश्यहीन, प्रभावहीन,और कतिपय पूंजीपति कारखाने दारों के इस्तेमाल के लिए के लिए मजबूर किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण अब कागज़ी हो गया है। सरकार की प्राथमिकताएं ही अलग हैं,उसी का परिणाम है कि अन्नदाता को जल-जंगल- जमीन बचाने के लिए सड़क किनारे शहबाजपुर डोर में बेमियादी धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।

नाईपुरा और बगद नदी इलाके का भूमिगत दूषित जल अब कोई दूरगामी चेतावनी नहीं, बल्कि हमारे खेतों की मेढ़ पर खड़ा एक कडुवा सच है। दूषित हो चुके जल-जंगल-ज़मीन को लेकर अन्नदाता कितने तनाव में हैं, वह आने वाले एक बड़े संकट की आहट है। अन्नदाता की दुर्दशा का असर केवल खेती-किसान के जीवन पर ही नहीं, बल्कि देश की जीडीपी और आम आदमी की रसोई पर पड़ेगा। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि जहरीली धरती और पानी हमारे विकास के माडल पर कैमिकल कारखानों द्वारा आघात है।

सरकार के नीति निर्धारकों को जलवायु अनुकूल कृषि की ओर युद्धस्तर पर बढना होगा। मिट्टी पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट दबाने,कैमिकल युक्त वातावरण और उसको मनमानी करने की सरकार की ओर से छूट ने आग में घी का काम किया है। वसंत ऋतु धीरे-धीरे गायब हो रही है, आम के बागों पर आने वाले फूल और मौर सूख रहे हैं, कैमिकल युक्त वातावरण समय से पहले परिपक्व कर दे रहा है, जहरीली हवा पराग के अंकुरण को बाधित कर रही है, नतीजा यह है कि या तो फूल गिर रहे हैं या निषेचन के बाद भी फल टिक नहीं पा रहे हैं,जिससे फूलों और फलों की गुणवत्ता घट गई है और वे समय से पहले झड़ने लगते हैं।

कैमिकल युक्त फफूंद जनित रोगों का जोख़िम बढ़ रहा है,फसलों, मवेशियों और किसानों में दूषित जल से फैल रही असाध्य बीमारियां एक चेतावनी है कि यदि सरकार ने इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए तो भविष्य के बसंत केवल लोकगीतों में ही जीवित रहेंगे। आरोप है कि अकेले रासायनिक कारखाने दारों के दुस्साहस ने अन्नदाता समेत जल-जंगल-जमीन चारों को एक साथ रसातल में पहुंचा दिया है।

इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी,राष्ट्रीय मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण चौहान मंडल अध्यक्ष एहसान अली, होमपाल सिंह, ओम प्रकाश सिंह, रमेश चंद्र, आजम चौधरी,रामचंद्र सिंह, मनोहर लाल, सत्यपाल सिंह, हाजी नन्नू सैफी, सोमपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, तनवीर सिंह, रघुवीर सिंह, सूखे सिंह, गंगाराम सिंह, रामशरण सिंह, जसवंत सिंह, चंद्रपाल सिंह, रतन सिंह, जसवीर सिंह, रामचंद्र सिंह, असद अली, अकिल चौधरी, बंश सिंह समेत काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।
