मुरादाबाद। जनपद में गुरुवार को आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों ने एकजुट होकर धरना दिया और टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के निर्णय का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए इस विषय में हस्तक्षेप की मांग की।
शिक्षकों का कहना है कि Right of Children to Free and Compulsory Education Act लागू होने के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया था, जबकि इससे पहले सेवा में आए शिक्षकों पर यह शर्त लागू नहीं थी। उनका तर्क है कि उस समय की नियमावली के अनुसार ही उनकी नियुक्ति हुई थी, इसलिए अब नई शर्तें थोपना उचित नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि हाल ही में Supreme Court of India के एक निर्णय के बाद आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी उत्तीर्ण करना सेवा जारी रखने और पदोन्नति के लिए आवश्यक कर दिया गया है। इसे लेकर शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है।
धरने में शामिल वक्ताओं ने कहा कि देशभर के शिक्षक Teachers Federation of India के नेतृत्व में इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार संसद के माध्यम से कानून में संशोधन कर या अध्यादेश लाकर आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट दे।
करीब डेढ़ बजे शुरू हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लिया। अंत में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया, जिसे प्रधानमंत्री तक भेजने का अनुरोध किया गया। ज्ञापन में मांग की गई है कि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के अधिकारों और सेवा शर्तों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
