अमरोहा। जांच समिति की अध्यक्षा एवं डिप्टी कलेक्टर श्रीमती चंद्रकांता ने कहा कि नमामि गंगे, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम, तथा एनजीटी के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम द्वारा लिए गए पानी के सैंपल की रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 20 फरवरी को नमामि गंगे, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य संबंधित विभागों की टीम ने बगद नदी समेत गजरौला के नाईपुरा इलाके में प्रदूषित जल का निरीक्षण कर सैंपल लिए थे। डिप्टी कलेक्टर चंद्रकांता ने बृहस्पतिवार को बताया कि जल निगम द्वारा दूषित पानी उगल रहे हैंडपंप को चिह्नित करके लाल निशान लगा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जांच के लिए लैब को भेजे सैंपल की रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के गजरौला इलाके में दूषित जल से नाईपुरा गांव में साइलेंट किलर जैसी ख़तरनाक स्थिति बन गई है, पिछले 68 दिनों से किसानों का धरना इसी त्रासदी को उजागर कर रहा है। तत्काल जांच, कैमिकल कारखानों पर सख्ती और स्वच्छ पानी की व्यवस्था जरुरी है, वरना स्वास्थ्य संकट और गहराएगा। इस समस्या के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले किसानों का अनिश्चितकालीन धरना आज 68वें दिन में प्रवेश कर गया है। धरना मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग 09 स्थित शहबाजपुर डोर पर जारी है, जहां दर्जनों किसान लगातार डटे हुए हैं। चिकित्सा विषेशज्ञों का मानना है कि औद्योगिक प्रदूषण के कारण भूजल दूषित होने पर स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, खासकर अमरोहा जिले के गजरौला-नाईपुरा जैसे क्षेत्रों में जहां किसान और खेतिहर मजदूर ज़हरीले पानी पर निर्भर हैं।
धरने पर बैठे किसानों का आरोप है कि गजरौला औद्योगिक क्षेत्र की रासायनिक इकाइयों से निकलने वाला दूषित पानी बगद नदी और भूमिगत जल स्रोतों को जहरीला बना रहा है। इससे हैंडपंप और ट्यूबवेल से पीला, बदबूदार पानी निकल रहा है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों में कैंसर जैसी घातक बीमारियां, त्वचा रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। फसलें बर्बाद हो रही हैं, दुधारू पशु प्रभावित हो रहे हैं, कोई सुनवाई नहीं होने की स्थिति में गांव से पलायन करने का मन बना रहे हैं पीड़ित किसान । आंदोलनकारी किसानों का नेतृत्व कर रहे भाकियू नेता नरेश चौधरी ने कहा कि 68 दिनों से धरने पर बैठे किसानों की कहीं कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। सरकार और प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जबकि रासायनिक कारखानों की हठधर्मिता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल विभाग की लापरवाही जारी है।
उन्होंने राजनीति दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि राजनेता किसानों को सिर्फ वोटबैंक समझते हैं। बिना आंदोलन के कोई समस्या हल नहीं होती, क्योंकि वोटबैंक का खतरा नहीं दिखता। दिल्ली का किसान आंदोलन इसका जीता- जागता उदाहरण है। गजरौला के शहबाजपुर डोर में किसानों ने पुतले फूंककर, ज्ञापन सौंपकर विरोध जताया, लेकिन अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्रवासी पलायन करने को मजबूर होंगे।
किसान संगठित होकर सड़कों पर उतरने को अपनी मजबूरी और राष्ट्रीय धर्म बता रहे हैं। क्षेत्र में सैकड़ों परिवार इस ‘साइलेंट किलर’ प्रदूषण से जूझ रहे हैं, जबकि सरकार की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अरुण सिद्धू, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह, अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एवं मंडल अध्यक्ष अहसान अली, जिला अध्यक्ष राशिद, पदाधिकारी सुरेंद्र सिंह, दिलशाद, ज़ैद, नाज़िम, फुरकान, अब्दुल रशीद, मंसूर अली, विजय सिंह, गंगाराम, रामसरन, राम प्रसाद, पृथ्वी सिंह, होमपाल सिंह, सोमपाल सिंह, अशद अली समेत तमाम किसान मौजूद रहे।
