अमरोहा। गजरौला-नाईपुरा क्षेत्र में दूषित जल की समस्या को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। हैंडपंपों से निकल रहे बदरंग और बदबूदार पानी को लेकर किसानों ने प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि पानी का रंग पीला, हरा और नीला नजर आ रहा है, जिससे लोगों में दहशत है और जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

किसानों ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि क्षेत्र में ऐसा “विकास” हुआ है कि होली के लिए अलग से रंग खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका आरोप है कि बगद नदी में औद्योगिक अपशिष्ट मिलाए जाने से जल स्रोत बुरी तरह प्रदूषित हो चुके हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की और कहा कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी, आंदोलन जारी रहेगा।

भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी ने कहा कि क्षेत्र में पानी “रासायनिक कॉकटेल” बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूषित जल के कारण लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन प्रशासन ठोस कार्रवाई करने के बजाय रिपोर्ट जारी करने में देरी कर रहा है।

प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान और अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एहसान अली ने कहा कि शहबाजपुर डोर पर चल रहा धरना सोमवार को 72वें दिन में प्रवेश कर गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ठोस समाधान नहीं दिया गया है।
सोमवार को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर बड़ी संख्या में महिलाएं भी धरनास्थल पहुंचीं। उनका कहना था कि जब घरों में शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं है तो वे चुप बैठने के बजाय आंदोलन में शामिल होकर न्याय की मांग करेंगी।

धरने में विमला, कैलाशो, ओमवती, राजमणि, मुनेश, दयावती, सूरज, गुड्डी कौर, सोमती, बीरा, कश्मीरी, कृष्णा, सीमा, कुसुम, संतोष, ओमप्रकाश, फिरोज़ चौधरी, ज्ञान सिंह, राम प्रसाद, विजय सिंह, समरपाल, गंगाराम, सतीराम, रामफल, मंसूर अली, पप्पू, विजय, अंकित, नूरजहाँ, अहद अली और चंद्रपाल सिंह सहित विभिन्न गांवों से पहुंचे किसान मौजूद रहे।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही दूषित जल की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल पानी का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और खेती-किसानी के भविष्य का सवाल है।
