अमरोहा। जिले के गजरौला क्षेत्र के नाईपुरा गांव में दूषित जल के खिलाफ किसानों की लड़ाई अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे-09 किनारे शहबाजपुर डोर पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) संयुक्त मोर्चा के बैनर तले चल रहा यह धरना अब 76वें दिन में पहुंच गया है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह संघर्ष भाकियू संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष नरेश चौधरी के कुशल और दृढ़ नेतृत्व में लगातार दो महीने से अधिक समय से मजबूती के साथ जारी है।
किसानों की आवाज बनकर उभरे नरेश चौधरी
किसानों और क्षेत्रीय लोगों के हितों की लड़ाई में नरेश चौधरी आज एक मजबूत और भरोसेमंद आवाज बनकर सामने आए हैं। गजरौला और आसपास के गांवों में जब भूजल दूषित होने से किसानों की फसलें, पशुधन और लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ने लगा, तब उन्होंने इस गंभीर समस्या को सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रहने दिया, बल्कि इसे व्यापक जनचिंता का विषय बना दिया।
उनके नेतृत्व में किसानों ने शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ आंदोलन शुरू किया, जो आज भी उसी संकल्प के साथ जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि नरेश चौधरी ने हमेशा किसानों की हक और सुरक्षा की आवाज बुलंद की है और इस आंदोलन ने उनकी नेतृत्व क्षमता को एक बार फिर साबित किया है।
रासायनिक कारखानों से बिगड़ा जल संकट
ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में मौजूद रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट ने भूजल को पूरी तरह प्रदूषित कर दिया है। गांव के हैंडपंपों से निकलने वाला पानी पीला, बदबूदार और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो गया है। इसका असर खेती, पशुपालन और ग्रामीणों के जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है।
किसान इसे “साइलेंट किलर” बताते हैं, जो धीरे-धीरे गांव की जिंदगी और आजीविका को खत्म कर रहा है।
दो महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष
नरेश चौधरी के नेतृत्व में किसान दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे-09 के किनारे लगातार धरना दे रहे हैं। किसानों ने कई बार प्रशासन से समाधान की मांग की, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदूषण की गंभीरता को दिखाने के लिए ग्रामीणों ने होली जैसे त्योहारों का भी बहिष्कार किया। उनका कहना है कि जब तक भूजल की शुद्धि, प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर सख्त कार्रवाई और स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों में भरोसे का नाम बने नरेश चौधरी
स्थानीय किसानों का कहना है कि नरेश चौधरी केवल एक संगठन के अध्यक्ष नहीं, बल्कि किसानों और ग्रामीण समाज की उम्मीद का प्रतीक बन चुके हैं। उन्होंने हमेशा जल, जमीन और किसानों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई है और गजरौला के इस आंदोलन में भी वे लगातार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
पर्यावरण और अधिकारों की लड़ाई
नाईपुरा का यह आंदोलन अब केवल दूषित पानी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरणीय न्याय, किसानों के अधिकार और ग्रामीण जीवन की रक्षा की बड़ी लड़ाई बन चुका है।
