दिल्ली शराब नीति (Excise Policy) मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार, 9 मार्च 2026 को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी करने के निचली अदालत के आदेश पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:
हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश:
- नोटिस जारी: न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सीबीआई की याचिका पर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।
- CBI अधिकारियों पर टिप्पणी पर रोक: कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सीबीआई और उसके जांच अधिकारियों के खिलाफ की गई “प्रतिकूल टिप्पणियों” और विभागीय जांच के आदेश पर फिलहाल रोक (Stay) लगा दी है।
- ED के मामले पर रोक: हाई कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि जब तक सीबीआई की इस याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई को टाल दिया जाए।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को होगी।
पृष्ठभूमि:
- निचली अदालत का फैसला: 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को सीबीआई द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में यह कहते हुए बरी (Discharge) कर दिया था कि जांच एजेंसी के पास पर्याप्त ठोस सबूत नहीं हैं।
- CBI की दलील: सीबीआई ने इस फैसले को “त्रुटिपूर्ण” (Perverse) बताया और हाई कोर्ट में इसे चुनौती दी। सीबीआई का तर्क है कि आबकारी नीति का मामला भ्रष्टाचार का एक स्पष्ट मामला है और उनके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
वर्तमान में, केजरीवाल और सिसोदिया जमानत पर बाहर हैं और हाई कोर्ट ने उनकी रिहाई को रद्द करने या बरी करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की सीबीआई की मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है।
