मुरादाबाद। भारतीय जनता पार्टी के मेयर विनोद अग्रवाल और जिला प्रशासन के बीच टकराव का मामला अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। अपनी ही सरकार के बुलडोजर एक्शन के बाद मेयर ने प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखकर अपने मान-सम्मान की रक्षा की गुहार लगाई है। पत्र सामने आने के बाद स्थानीय से लेकर प्रदेश स्तर तक सियासी हलचल तेज हो गई है।
मुरादाबाद के भाजपा महापौर विनोद अग्रवाल ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को लिखे पत्र में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि वह करीब 40 वर्षों से भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े रहे हैं, लेकिन अब जिला प्रशासन के अधिकारियों पर उनका भरोसा नहीं रह गया है। मेयर ने मांग की है कि उनके मान-सम्मान की रक्षा की जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

दरअसल पूरा मामला मुरादाबाद के धीमरी गांव से जुड़ा है। प्रशासन ने 12 मार्च को कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर एक बाउंड्री वॉल को गिरा दिया और जमीन को कब्जामुक्त करा लिया। प्रशासन का कहना है कि यह सरकारी जमीन पर किया गया अवैध निर्माण था।
वहीं मेयर विनोद अग्रवाल का दावा है कि यह जमीन उनकी निजी संपत्ति है, जिसे उन्होंने करीब 10 वर्ष पहले खरीदा था और उस पर खेती भी हो रही थी। मेयर के अनुसार बाउंड्री वॉल गिराए जाने से उन्हें लगभग 75 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

मेयर ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि इस कार्रवाई से उनका मनोबल टूट गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे माहौल में वह कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनका मनोबल कैसे बढ़ाएंगे। साथ ही उन्होंने मांग की है कि जमीन की पैमाइश किसी दूसरे जिले के निष्पक्ष अधिकारियों से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई को सरकार की सख्त नीति के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में जब उसी पार्टी के एक मेयर को प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है तो विपक्ष को भी सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रदेश नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है—क्या मेयर की मांग पर दोबारा जांच होगी या फिर प्रशासन की कार्रवाई को ही सही ठहराया जाएगा। फिलहाल मुरादाबाद से लेकर लखनऊ तक इस पूरे प्रकरण को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है।
