संभल। संभल जिले की एक मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले लोगों की संख्या सीमित करने के जिला प्रशासन के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि धार्मिक स्थल पर नमाजियों की संख्या तय करना प्रशासन का अधिकार क्षेत्र नहीं है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि नमाज के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं और यदि कोई व्यक्ति नमाज में बाधा डालने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रशासन का कर्तव्य कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि धार्मिक गतिविधियों पर इस प्रकार का प्रतिबंध लगाना।
दरअसल, संभल जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की आशंका का हवाला देते हुए एक मस्जिद में नमाज के दौरान नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को अदालत में चुनौती दी गई थी। मामले की सुनवाईये के दौरान हाईकोर्ट ने पहले भी प्रशासन के इस कदम पर कड़ी नाराजगी जताई थी।
पिछली सुनवाई में अदालत ने राजेंद्र पेंसिया (जिलाधिकारी, संभल) और के के बिश्नोई (पुलिस अधीक्षक) को फटकार लगाते हुए कहा था कि यदि प्रशासन को लगता है कि वह कानून व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं है तो अधिकारियों को पद छोड़ देना चाहिए या अपना तबादला करवा लेना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रशासन किसी भी मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या तय नहीं कर सकता।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि नमाज के समय क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे। साथ ही यह भी कहा गया कि अगर कोई व्यक्ति या समूह धार्मिक गतिविधि में बाधा डालने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ तुरंत प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के इस आदेश के बाद प्रशासन को अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान देना होगा, जबकि मस्जिद में नमाज अदा करने पर लगाया गया प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त हो गया है।
