अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने तेहरान के सामने 15 बिंदुओं वाला एक संभावित शांति प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव में एक महीने के युद्धविराम, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने, और Hamas व Hezbollah जैसे प्रॉक्सी संगठनों को समर्थन बंद करने की मांग शामिल बताई जा रही है। साथ ही, Strait of Hormuz को दोबारा खोलने की शर्त भी रखी गई है।
इसके बदले में अमेरिका ने ईरान को कुछ राहत देने का संकेत दिया है, जिसमें सीमित प्रतिबंध हटाना और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की अनुमति शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए ईरान तक पहुंचाने की कोशिश की गई है, और इसमें Shehbaz Sharif की भूमिका भी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव में ईरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य ढांचे को सीमित करने की बात भी शामिल है, साथ ही परमाणु ईंधन से जुड़ी सुविधाओं को देश से बाहर रखने का सुझाव दिया गया है। हालांकि, कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि ये शर्तें इतनी सख्त हैं कि मौजूदा हालात में ईरान के लिए इन्हें स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है।
इस बीच, अमेरिका के इस कदम ने Israel को भी चौंका दिया है, क्योंकि वहां के कुछ अधिकारी युद्ध जारी रखने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, Pentagon ने क्षेत्र में 3,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी की है, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।
ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर सैन्य गतिविधियां तेज होती हैं, तो वह खाड़ी क्षेत्र में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नया प्रस्ताव पूरी तरह अलग नहीं है, बल्कि 2025 में आए एक पुराने मसौदे का संशोधित रूप हो सकता है, जो पहले सफल नहीं हो पाया था।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से ईरान के सामने रखा गया है या नहीं। खुद Iran ने भी किसी बड़े स्तर की बातचीत से इनकार किया है और केवल सीमित संपर्कों की बात कही है।
विश्लेषकों के मुताबिक, Donald Trump इस टकराव से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और राजनीतिक जटिलताएं इस प्रक्रिया को मुश्किल बना रही हैं।
