Indian National Congress को दिल्ली स्थित 24, अकबर रोड वाला दफ्तर 28 मार्च तक खाली करने के लिए कहा गया है। एस्टेट विभाग ने इस संबंध में नोटिस जारी किया है और रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी को केवल कुछ दिन का समय दिया गया है।
हालांकि, कांग्रेस पहले ही अपना मुख्यालय नए परिसर ‘इंदिरा भवन’ में शिफ्ट कर चुकी है, लेकिन पार्टी पुराने दफ्तर को पूरी तरह खाली करने के पक्ष में नहीं दिख रही। इस बीच 5, रायसीना रोड स्थित Indian Youth Congress कार्यालय को लेकर भी अलग से नोटिस जारी किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती दे सकती है। पार्टी का आरोप है कि Bharatiya Janata Party के कुछ पुराने दफ्तरों को इस तरह खाली नहीं कराया गया है।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने 14 जनवरी 2025 को करीब चार दशक बाद अपना मुख्यालय बदला था। नया ‘इंदिरा भवन’ काफी समय से निर्माणाधीन था, जिसकी नींव Manmohan Singh और Sonia Gandhi ने रखी थी।
इतिहास की बात करें तो 24, अकबर रोड का यह बंगला लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। 1970 के दशक के अंत में पार्टी में टूट के बाद इसे मुख्यालय बनाया गया था और तब से लेकर हाल तक यही पता कांग्रेस की पहचान बना रहा।
इस जगह को “बर्मा हाउस” भी कहा जाता था—यह नाम Jawaharlal Nehru ने दिया था। यहां कभी म्यांमार की राजदूत डॉ. खिन काई भी रहीं, जो Aung San Suu Kyi की मां थीं।
राजनीतिक तौर पर भी यह दफ्तर अहम रहा है, क्योंकि यहां से Indira Gandhi, Rajiv Gandhi, P. V. Narasimha Rao और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं के दौर की रणनीतियां तय हुईं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लुटियंस दिल्ली में स्थित राजनीतिक दलों को अपने दफ्तर दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कहा गया था, ताकि इलाके में भीड़भाड़ कम हो सके। इसके बाद भाजपा ने पहले ही अपना नया कार्यालय बना लिया था, जबकि कांग्रेस ने भी नया मुख्यालय तैयार कर लिया—लेकिन पुराना दफ्तर अभी तक पूरी तरह खाली नहीं किया गया था।
अब सरकार के ताजा नोटिस के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है और आने वाले दिनों में यह मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
