मुरादाबाद। महानगर के प्रतिभाशाली युवा निकुंज गुप्ता ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा में सब-रजिस्ट्रार पद पर 6वीं रैंक हासिल कर जिले को गौरवान्वित किया है। पांचवें प्रयास में मिली यह सफलता न सिर्फ उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह उनके धैर्य, अनुशासन और अटूट विश्वास की प्रेरक कहानी भी बयां करती है।

निकुंज गुप्ता एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। दीनदयाल नगर कॉलोनी निवासी उनके पिता श्री किशोरीलाल गुप्ता व्यवसायी हैं, जबकि माता श्रीमती रेखा गुप्ता गृहिणी हैं। परिवार का वातावरण हमेशा शिक्षा और संस्कारों से ओत-प्रोत रहा, जिसने निकुंज के व्यक्तित्व को मजबूती दी। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उन्हें हर संभव सहयोग दिया और निकुंज ने भी उस विश्वास को अपनी मेहनत से सार्थक साबित किया।
शिक्षा और असाधारण उपलब्धियां
निकुंज की शैक्षणिक यात्रा भी उतनी ही प्रभावशाली रही है। उन्होंने वर्ष 2009 में इंटरमीडिएट पास किया। इसके बाद 2012 में बी.कॉम (कम्प्यूटराइज्ड) और सी.एस. (कम्प्यूटर) की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के क्रम में उन्होंने 2015 में एलएलबी और 2017 में इकोनॉमिक्स से एम.ए. किया। निकुंज ने न केवल पारंपरिक शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। स्काउटिंग में उन्होंने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से पदक प्राप्त किया, जो उनके अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
इसके अलावा उन्होंने कंपनी सेक्रेटरीशिप (CS) का कठिन कोर्स मात्र 2 वर्षों में पूरा कर लिया, जबकि सामान्यतः इसे पूरा करने में 4 वर्ष का समय लगता है। यह उनकी असाधारण मेहनत और एकाग्रता का स्पष्ट उदाहरण है।

संघर्ष और धैर्य की कहानी
दिल्ली में रहकर निकुंज ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। EWS वर्ग से आने के कारण उन्हें आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। शुरुआती चार प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर बार अपनी रणनीति को और बेहतर किया।
उनका मानना रहा कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सीखने का एक अवसर है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा और अंततः पांचवें प्रयास में सफलता हासिल कर ली।

परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर
जैसे ही UPPSC का परिणाम घोषित हुआ और निकुंज की सफलता की खबर सामने आई, उनके घर में खुशी का माहौल छा गया। परिवार के सदस्यों की आंखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी। रिश्तेदारों, मित्रों और क्षेत्रवासियों ने उनके घर पहुंचकर मिठाई खिलाई और बधाइयों का सिलसिला देर तक चलता रहा।

चाचा विवेक गुप्ता का बयान
निकुंज की इस सफलता पर उनके चाचा विवेक गुप्ता ने भावुक होते हुए कहा—
“निकुंज बचपन से ही बेहद मेहनती और अनुशासित रहा है। उसने हमेशा अपने लक्ष्य को लेकर गंभीरता दिखाई और कभी हार नहीं मानी। परिवार की परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन उसने हर चुनौती को अवसर में बदला। आज उसकी सफलता हम सभी के लिए गर्व का विषय है। यह सिर्फ हमारे परिवार की नहीं, बल्कि पूरे मुरादाबाद की उपलब्धि है। हमें पूरा विश्वास है कि वह आगे भी ईमानदारी और समर्पण के साथ समाज की सेवा करेगा।”
युवाओं के लिए प्रेरणा
निकुंज गुप्ता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सहयोग को दिया है। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा-
“सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर मेहनत, सही दिशा और धैर्य ही आपको मंजिल तक पहुंचाते हैं। असफलता से घबराएं नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ें।”
निकुंज गुप्ता की यह उपलब्धि यह साबित करती है कि छोटे शहरों के युवा भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें साकार कर सकते हैं। उनका संघर्ष और सफलता आज हजारों युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है।
