मंगलवार को हुई योगी कैबिनेट बैठक में कुल 22 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जानकारी दी कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी कर दी गई है। अब शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये और अनुदेशकों को 17 हजार रुपये मिलेंगे। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल से लागू हो चुकी है और 1 मई से बढ़ा हुआ मानदेय खातों में आना शुरू हो जाएगा। पहले अनुदेशकों को 9 हजार और शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मिलते थे। प्रदेश में फिलहाल 1.42 लाख से अधिक शिक्षामित्र और करीब 24 हजार अनुदेशक कार्यरत हैं।
कैबिनेट ने मदरसों से जुड़ा एक बड़ा फैसला भी लिया है। अब सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों की भर्ती शिक्षा सेवा चयन आयोग के जरिए होगी, यानी उम्मीदवारों को परीक्षा देनी होगी। साथ ही, मदरसों के संचालन के लिए नई गाइडलाइन तैयार की जाएगी, जिसमें 8 घंटे की पढ़ाई, ऑनलाइन उपस्थिति और छात्रों का पूरा डेटा रिकॉर्ड करना अनिवार्य होगा।
परिवहन विभाग के प्रस्तावों के तहत 49 बस स्टैंड को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की मंजूरी दी गई है, जिससे करीब 4000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। हर जिले में कम से कम एक आधुनिक बस स्टैंड बनाने की योजना है। इसके अलावा, विभिन्न जिलों में बस स्टैंड और डिपो के लिए सरकारी जमीन मुफ्त में उपलब्ध कराने के प्रस्ताव भी पास किए गए हैं।
औद्योगिक विकास विभाग को 25 लाख टैबलेट खरीदने के लिए टेंडर की मंजूरी मिली है। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत अब तक 60 लाख टैबलेट वितरित किए जा चुके हैं। निवेशकों को सब्सिडी देने जैसे प्रस्ताव भी मंजूर किए गए हैं।
एक और महत्वपूर्ण फैसले में, विभाजन के समय पाकिस्तान से आए 12 हजार परिवारों को भूमि अधिकार देने को मंजूरी दी गई है। ये परिवार पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर और रामपुर जिलों में रहते हैं।
इसके अलावा, गोरखपुर में बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को हरी झंडी दी गई है, जिस पर करीब 491 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह विश्वविद्यालय 50 हेक्टेयर में विकसित होगा और इसमें विभिन्न डिग्री व डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जाएंगे।
कैबिनेट ने ‘डॉ. बी.आर. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को भी मंजूरी दी है। इसके तहत प्रदेशभर में महापुरुषों की पहले से स्थापित मूर्तियों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। हर मूर्ति पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होंगे और प्रत्येक विधानसभा के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। योजना के तहत नई मूर्तियां नहीं लगाई जाएंगी, बल्कि 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित मूर्तियों को ही विकसित किया जाएगा। इसमें संत रविदास, कबीरदास और ज्योतिबा फुले जैसे समाज सुधारकों की मूर्तियां शामिल होंगी।
