मुरादाबाद। शहर के लालबाग स्थित प्राचीन काली माता मंदिर का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है और पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है। जूना अखाड़ा द्वारा महंत सज्जन गिरी और रामगिरी को हटाने की घोषणा के बाद मामला तेजी से तूल पकड़ गया है। एक ओर अखाड़ा प्रतिनिधिमंडल इसे जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी ओर मौजूदा महंत इसे मंदिर पर कब्जे की साजिश करार दे रहे हैं।
दरअसल, बुधवार को जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता महाराज शिवेंद्र जी और महाराज नारायण गिरी के नेतृत्व में करीब 25 सदस्यीय जांच दल मुरादाबाद पहुंचा। इस दल ने प्राचीन काली मंदिर में पहुंचकर व्यवस्थाओं, गतिविधियों और महंतों के आचरण को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं और भक्तों से विस्तृत जानकारी जुटाई। बताया गया कि लंबे समय से मंदिर के महंत सज्जन गिरी और रामगिरी के खिलाफ कई शिकायतें अखाड़े तक पहुंच रही थीं, जिनके आधार पर यह जांच की गई।

जांच के बाद प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी अनुज सिंह से मिलने उनके कार्यालय पहुंचा। मुलाकात के उपरांत महाराज नारायण गिरी ने मीडिया से बातचीत में बड़ा बयान देते हुए कहा कि तत्काल प्रभाव से महंत सज्जन गिरी और रामगिरी को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगले दो से तीन दिनों में नए महंतों की नियुक्ति कर दी जाएगी और हटाए गए महंतों को अन्यत्र भेजा जाएगा।
इस घोषणा के सामने आते ही माहौल अचानक गर्मा गया। शाम करीब 7:30 बजे महंत सज्जन गिरी ने मंदिर परिसर में ही प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर जूना अखाड़ा के प्रतिनिधिमंडल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नारायण गिरी मंदिर पर कब्जा करने की मंशा से यहां आए थे और जांच के नाम पर 20-25 लोगों के साथ दबाव बनाने की कोशिश की गई।
सज्जन गिरी ने यह भी कहा कि वह जूना अखाड़ा से जुड़े किसी मठ के महंत जरूर हैं, लेकिन मुरादाबाद के इस प्राचीन सिद्ध काली मंदिर पर उनकी नजर पहले से रही है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी इस तरह की कोशिशें की जा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय लोग व्यक्तिगत स्वार्थ में मंदिर के खिलाफ गलत शिकायतें कर रहे हैं और “जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद” कर रहे हैं।

महंत सज्जन गिरी ने अपने पक्ष को मजबूत करते हुए कहा कि यह मंदिर गुरु-शिष्य परंपरा के तहत संचालित है और उन्हें उनके गुरु द्वारा विधिवत यहां आसीन किया गया है। ऐसे में किसी बाहरी हस्तक्षेप को वह स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी कीमत पर मंदिर की बागडोर नहीं छोड़ेंगे और उनके साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े हैं।
प्रकरण में महंत रामगिरी का कहना है कि पूर्व में उनके और महंत सज्जनगिरी के बीच कुछ विवाद जरूर था, लेकिन उसे आपसी सहमति से सुलझा लिया गया था और वर्तमान में कोई विवाद नहीं है। उन्होंने बताया कि जूना अखाड़ा के खिलाफ उन्होंने न्यायालय में वाद दायर कर रखा है। यदि अखाड़े को कोई आपत्ति है, तो वह न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत करे।
रामगिरी ने महंत सज्जनगिरी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्राचीन श्री काली मंदिर में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत ही पदों का उत्तराधिकार होता रहा है। वह अपने गुरुओं की वसीयत के अनुसार अपने-अपने पदों पर आसीन हैं और उन्हें कोई भी हटाने का अधिकार नहीं रखता।
उधर, जांच दल के मंदिर पहुंचने की सूचना मिलते ही प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया। किसी भी संभावित विवाद या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मंदिर परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
गौरतलब है कि मंदिर की वर्तमान स्थिति और दोनों महंतों की कार्यशैली को लेकर शहर में पहले से ही तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। अब जूना अखाड़ा की सक्रियता और महंतों को हटाने की घोषणा के बाद यह विवाद निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल, स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर अखाड़ा परिषद अंतिम निर्णय की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर महंत सज्जन गिरी और रामगिरी ने खुलकर विरोध का बिगुल फूंक दिया है।
