मुरादाबाद/प्रयागराज। कथित धर्म परिवर्तन प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी छात्रा को अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य न होने की बात कहते हुए यह राहत प्रदान की।
जस्टिस अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने मालिश्का उर्फ मालिश्का फातमा को अग्रिम जमानत देते हुए टिप्पणी की कि पीड़िता के बयान के अलावा रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है, जिससे आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित हो सके।

यह मामला मुरादाबाद जिले के बिलारी थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा के भाई ने एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ छात्राओं ने उसकी नाबालिग बहन पर दबाव डालते हुए उसका कथित तौर पर ब्रेनवॉश किया और उसे बुर्का पहनने व इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया।
एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया कि दिसंबर 2025 में एक घटना के दौरान छात्रा को जबरन बुर्का पहनाया गया। साथ ही आरोप है कि उसे खानपान के जरिए भी प्रभावित करने की कोशिश की गई। इस मामले में कई अन्य छात्राओं के नाम भी सामने आए थे।

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अदालत में अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता के बयान से स्पष्ट है कि उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा था। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी को लेकर दलील दी गई कि पीड़िता आरोपी के प्रभाव में थी, जिसके कारण मामला सामने आने में समय लगा।
फिलहाल, अदालत के इस आदेश के बाद मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
