दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पांच वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। यह मामला दिल्ली शराब नीति (एक्साइज पॉलिसी) केस से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चल रही थी। हालांकि अब इस मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जज के खिलाफ सोशल मीडिया पर सुनियोजित तरीके से अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य उनकी छवि धूमिल करना और न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचाना था। अदालत के मुताबिक, सुनवाई के दौरान ही सोशल मीडिया पर वीडियो, चिट्ठियां और रिकॉर्डिंग साझा कर जज को निशाना बनाया गया। कोर्ट ने इसे न्यायपालिका को प्रभावित करने और दबाव बनाने की कोशिश बताया।
जस्टिस शर्मा ने कहा कि उनके एक पुराने भाषण के वीडियो को एडिट कर गलत तरीके से पेश किया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि उनका किसी राजनीतिक दल से संबंध है। अदालत ने यह भी कहा कि जज के परिवार को भी विवाद में घसीटने की कोशिश की गई, जो बेहद गंभीर मामला है।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर अरविंद केजरीवाल को अदालत के आदेश पर आपत्ति थी तो वे सुप्रीम कोर्ट जा सकते थे, लेकिन इसके बजाय उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान और वीडियो जारी किए। अदालत के अनुसार, इन बयानों से लोगों के मन में न्यायपालिका को लेकर अविश्वास पैदा करने की कोशिश हुई।
दिल्ली हाई कोर्ट ने जिन नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की है उनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और विनय मिश्रा शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि केजरीवाल के बयान के बाद पार्टी के अन्य नेताओं ने भी उसी तरह की बातें दोहराईं।
वहीं, इस पूरे मामले पर अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “सत्य की जीत हुई। गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई।”
