मुरादाबाद। रजिस्ट्री व्यवस्था के कथित निजीकरण और ई-रजिस्ट्री प्रणाली के विरोध में गुरुवार को मुरादाबाद के अधिवक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। पिछले दस दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन के बाद सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता सड़कों पर उतर आए और जोरदार नारेबाजी करते हुए रजिस्ट्री कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला।
अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और अन्य संबंधित लोगों ने सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार रजिस्ट्री व्यवस्था को निजी कंपनी के हवाले करने की तैयारी कर रही है, जिससे न केवल पारदर्शिता प्रभावित होगी बल्कि हजारों लोगों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले दस दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रम चलाए जा रहे थे, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। इससे अधिवक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है।
वकीलों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। रजिस्ट्री कार्यालय, कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण, ई-रजिस्ट्री संचालन और प्रस्तावित निबंधन मित्र योजना को वापस लेने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इन प्रस्तावों को वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

प्रमुख मांगें
रजिस्ट्री व्यवस्था का निजीकरण तत्काल वापस लिया जाए।
ई-रजिस्ट्री संचालन में निजी कंपनियों की भूमिका समाप्त की जाए।
प्रस्तावित निबंधन मित्र योजना को निरस्त किया जाए।
अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टांप विक्रेताओं और टाइपिस्टों के हितों की रक्षा की जाए।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। गुरुवार का प्रदर्शन अब तक के आंदोलन का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।
