मुरादाबाद, 18 अगस्त। मानसून और पहाड़ों पर हो रही अतिवृष्टि के बीच मुरादाबाद मंडल के पांचों जिलों मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, संभल और अमरोहा में बाढ़ सुरक्षा, राहत-बचाव और जन-जागरूकता को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। वर्तमान में मंडल की प्रमुख नदियों रामगंगा, गंगा, कोसी, मालन और ढेला का जलस्तर खतरे के निशान से औसतन डेढ़ से दो मीटर नीचे बह रहा है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। मंडल भर में बाढ़ की किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 124 बाढ़ चौकियां, 98 बाढ़ आश्रय स्थल सक्रिय कर दिए गए हैं। साथ ही पीएसी की फ्लड रेस्क्यू यूनिट, दर्जनों प्रशिक्षित गोताखोरों और सैकड़ों आपदा मित्रों को तैनात किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत गांव-गांव राहत चौपालें आयोजित कर ग्रामीणों को ‘सचेत ऐप’ डाउनलोड कराया जा रहा है और कंट्रोल रूम के जरिए सीधे ग्राम प्रधानों से संपर्क साधा जा रहा है।
1. मुरादाबाद: रामगंगा का जलस्तर स्थिर, 35 बाढ़ चौकियों और 16 चौपालों से 199 गांवों पर निगरानी
मुरादाबाद के जिला आपदा विशेषज्ञ प्रदीप कुमार के अनुसार, जिले में कटघर रेलवे पुल पर रामगंगा का जलस्तर 188.23 मीटर के आसपास दर्ज किया गया है, जो खतरे के 190 मीटर के निशान से करीब डेढ़ मीटर नीचे है। हाल ही में उत्तराखंड के जलाशय से ठाकुरद्वारा क्षेत्र की सहायक ढेला नदी में छोड़ा गया 9,484 क्यूसेक पानी बिना किसी बड़े नुकसान के अगले 24 घंटे में डिस्चार्ज हो जाएगा। जिले में जब तक मुख्य बांधों से 25 से 30 हजार क्यूसेक पानी लगातार दो-तीन दिन नहीं छोड़ा जाता, तब तक बड़े खतरे की आशंका नहीं है। प्रशासन ने कृषि के दृष्टिकोण से 199 गांव और आबादी के लिहाज से मूढापांडे के रनिया ठेर व हरपाल नगर सहित 12 से 15 संवेदनशील गांव चिन्हित किए हैं। शहरी क्षेत्र में भोलानाथ कॉलोनी, गागन नदी से प्रभावित वार्ड और नागफनी के निचले इलाकों पर निगरानी है। जिले में 35 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं और चारों तहसीलों में चार-चार अनिवार्य राहत चौपालों का आयोजन कर ग्रामीणों को 1078 टोल-फ्री नंबर व सचेत ऐप की जानकारी दी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति के लिए पीएसी की सर्च एंड रेस्क्यू फ्लड यूनिट और आरटीओ के जरिए वाहन व ईंधन की व्यवस्था मुकम्मल कर ली गई है।
2. बिजनौर: 32 चौकियों और 35 आश्रय स्थलों से चौकसी, गंगा-खोह के गेज पर हर दो घंटे में अलर्ट
बिजनौर के जिला आपदा विशेषज्ञ प्रशांत सक्सेना ने बताया कि जिले में गंगा, मालन और खोह नदियों के प्रवाह पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। गंगा नदी नजीबाबाद, बिजनौर और चांदपुर तहसील से होकर गुजरती है, जहां ढाई से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी आने पर ही चांदपुर के खादर बेल्ट में प्रभाव पड़ता है। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 24 संवेदनशील और 5 अतिसंवेदनशील गांव चिन्हित हैं, जबकि पिछले वर्ष के आधार पर करीब 44 कृषि प्रभावित गांवों पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने 32 बाढ़ चौकियां और 35 बाढ़ आश्रय स्थल सक्रिय कर दिए हैं। तहसील स्तर पर सुरक्षा उपकरण वितरित किए जा चुके हैं तथा ब्लॉकवार मेडिकल व पशु चिकित्सा टीमों द्वारा टीकाकरण किया जा रहा है। जिला कंट्रोल रूम में आईएमडी से सूचना मिलते ही हर दो घंटे में एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ और ग्राम प्रधानों के साथ-साथ आपदा मित्रों को मौसम का अलर्ट भेजा जाता है। सचेत ऐप के माध्यम से लोगों को दो-तीन घंटे पूर्व चेतावनी मिल रही है, जिससे प्रशासन और ग्रामीण दोनों सतर्क हैं।
3. रामपुर: कोसी-रामगंगा के 12 संवेदनशील गांवों पर नजर, 30 बाढ़ चौकियों के साथ प्रशासनिक अमला अलर्ट
रामपुर के जिला आपदा विशेषज्ञ दीपक पाल के अनुसार जिला प्रदेश के 44 अतिसंवेदनशील बाढ़ जिलों में शामिल नहीं है, फिर भी एहतियात के तौर पर पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। कोसी और रामगंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर निचले कृषि क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका रहती है, जिसके मद्देनजर 12 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। जिले में 30 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं और राहत व बचाव कार्यों से जुड़े सभी पांच प्रकार के टेंडर पूरे कर लिए गए हैं। रामनगर बैराज और रामगंगा डैम के कंट्रोल रूम से लगातार समन्वय स्थापित है और उनके ग्रुपों से रियल टाइम जलस्तर का डेटा लिया जा रहा है। जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। सचेत ऐप और आपदा मित्रों की ट्रेनिंग के जरिए ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट किया जा रहा है, जबकि वर्तमान में नदियों का जलस्तर खतरे के पैमाने से काफी नीचे बना हुआ है।
4. संभल: गुन्नौर क्षेत्र में गंगा के मुहाने पर 16 चौकियां, 52 गोताखोर और 100 आपदा मित्र मुस्तैद
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कार्यालय संभल से मिली जानकारी के अनुसार, जिले की गुन्नौर तहसील बाढ़ के लिहाज से सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर 178.04 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के 178.765 मीटर के निशान से नीचे है। भीमगोडा बैराज से छोड़े जाने वाले पानी पर नजर रखी जा रही है और वर्तमान में 1,15,137 क्यूसेक पानी बह रहा है, जबकि खतरे की स्थिति ढाई लाख क्यूसेक से अधिक डिस्चार्ज पर बनती है। वर्ष 2010 की बाढ़ के मानकों के आधार पर डूब क्षेत्र वाले 6 अतिसंवेदनशील गांवों सहित कुल 36 गांवों की सघन निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने 16 बाढ़ चौकियां और 13 बाढ़ शेल्टर स्थापित किए हैं। राहत कार्यों के टेंडर पूरे हो चुके हैं और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 52 स्थानीय गोताखोरों व 100 आपदा मित्रों को चिन्हित कर तैनात किया गया है, जो एसडीएम के निर्देश पर तत्काल मौके पर पहुंचने के लिए तैयार हैं।
5. अमरोहा: 11 बाढ़ चौकियां व 15 शेल्टर तैयार, पीएसी की 15वीं बटालियन और 25 गोताखोरों का पहरा
अमरोहा के जिला आपदा विशेषज्ञ पवन कुमार शुक्ला ने बताया कि जिले में गंगा नदी का जलस्तर सामान्य स्थिति में है और खतरे के निशान से डेढ़ से दो मीटर नीचे चल रहा है। संभावित बाढ़ को देखते हुए धनौरा और हसनपुर तहसील में 11 बाढ़ चौकियां और 15 बाढ़ शरणालय पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं। जिले में 25 अतिसंवेदनशील गांव, जिनमें धनौरा के 15-16 और हसनपुर के 5-7 गांव शामिल हैं, तथा 75 से 80 संवेदनशील गांवों को चिन्हित कर निगरानी की जा रही है। नाव, खाद्यान्न, भूसा, लॉजिस्टिक्स, टेंट और पके भोजन के टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। राहत-बचाव के लिए पीएसी की 15वीं बटालियन की एक टीम प्रभावित क्षेत्र में तैनात है और 25 स्थानीय गोताखोरों को एक्टिव मोड पर रखा गया है। बिजनौर, हरिद्वार और मेरठ बैराजों से लगातार समन्वय बनाकर 24 घंटे क्रियाशील जिला व तहसील स्तरीय कंट्रोल रूम के जरिए जलस्तर की निगरानी की जा रही है@जफर/INN
